अयोध्या राम मंदिर: रामलला के अलौकिक श्रृंगार और दैनिक दर्शन की विस्तृत जानकारी
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान प्रभु श्री रामलला का नित्य श्रृंगार और पूजन विधि-विधान के साथ संपन्न होता है। 30 जुलाई, गुरुवार (श्रावण कृष्ण पक्ष प्रतिपदा, विक्रम संवत 2082) को रामलला का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसकी छटा देखते ही बनती थी। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान प्रभु के प्रतिदिन दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।
नित्य दर्शन और आरती का समय
श्री रामलला के दर्शन और आरती का समय निश्चित है, जिसके अनुसार भक्त प्रभु के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर में दिनचर्या की शुरुआत सुबह 6:30 बजे पहली आरती के साथ होती है।
- सुबह 6:30 बजे: पहली आरती (जागृत अवस्था)
- दोपहर 12:00 बजे: भोग आरती
- शाम 7:30 बजे: संध्या आरती
- रात 8:30 बजे: शयन आरती
श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय शाम 7:30 बजे तक ही निर्धारित है। पूजन की प्रक्रिया में प्रभु को जगाने, स्नान कराने, लेप लगाने और वस्त्र धारण कराने की परंपरा का पालन किया जाता है।
विशेष श्रृंगार और भोग व्यवस्था
रामलला का श्रृंगार मौसम और तिथि के अनुसार किया जाता है। गर्मियों के दौरान प्रभु को सूती और हल्के वस्त्र पहनाए जाते हैं। प्रभु के लिए विशेष रूप से दिल्ली से फूलों की मालाएं मंगाई जाती हैं, जो उनके दिव्य स्वरूप में चार चांद लगा देती हैं।
प्रभु के भोग की व्यवस्था मंदिर की रसोई में ही की जाती है, जहाँ सात्विक व्यंजनों को तैयार किया जाता है। दिनभर में चार बार प्रभु को भोग अर्पित किया जाता है, जिसकी शुरुआत सुबह ‘बाल भोग’ से होती है। राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्धारित इन नियमों के तहत ब्रह्मांड नायक श्री रामलला की सेवा-पूजा अनवरत जारी रहती है।
