इलाहाबाद हाईकोर्ट से पूर्व आईएएस निरंजन दास को बड़ी राहत, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में मिली जमानत
प्रयागराज/रायपुर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश के मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास को जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि केवल आरोपी के पुराने आपराधिक इतिहास के आधार पर उसे जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि वह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है या उसके फरार होने की प्रबल संभावना है।
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जमानत का उद्देश्य ट्रायल में उपस्थिति सुनिश्चित करना: कोर्ट
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि जमानत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहे। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार की ओर से ऐसे कोई पुख्ता सबूत नहीं दिए गए, जिससे यह साबित हो सके कि निरंजन दास जांच में बाधा डालेंगे या गवाहों को प्रभावित करेंगे। अदालत ने जोर देकर कहा कि ट्रायल के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उसे जेल में रखना ही एकमात्र विकल्प नहीं है, इसलिए केवल पूर्व रिकॉर्ड के आधार पर राहत को खारिज करना न्यायोचित नहीं है।
2,161 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का है मामला
यह पूरा मामला कथित तौर पर 2,161 करोड़ रुपये के आबकारी घोटाले से संबंधित है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में यूपी में जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और पुलिस द्वारा चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, जिसमें कुल 22 गवाहों का उल्लेख है।
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सुप्रीम कोर्ट से भी मिल चुकी है राहत
सुनवाई के दौरान निरंजन दास के पक्ष में एक बड़ा तर्क यह रखा गया कि छत्तीसगढ़ से जुड़े मुख्य मामले में सुप्रीम कोर्ट उन्हें मई 2026 में ही जमानत दे चुका है। हाईकोर्ट ने इस तथ्य को संज्ञान में लेते हुए माना कि कथित आर्थिक अनियमितता का मुख्य केंद्र छत्तीसगढ़ है। चूंकि यूपी में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है और मामले में लंबी सुनवाई की संभावना है, इसलिए अदालत ने मानवीय और कानूनी आधार पर उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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