Sawan 2026: सावन में इन 5 पवित्र स्थानों पर जलाभिषेक है सबसे कठिन


पवित्र सावन का महीना आगामी 30 जुलाई 2026 से आरंभ होने जा रहा है। महादेव की भक्ति में लीन श्रद्धालु इस पूरे माह शिवलिंग पर जलाभिषेक कर और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। हालांकि, देश-दुनिया में शिव के कुछ ऐसे पावन धाम भी हैं, जहां तक पहुंचना और जलाभिषेक करना किसी…

पवित्र सावन का महीना आगामी 30 जुलाई 2026 से आरंभ होने जा रहा है। महादेव की भक्ति में लीन श्रद्धालु इस पूरे माह शिवलिंग पर जलाभिषेक कर और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। हालांकि, देश-दुनिया में शिव के कुछ ऐसे पावन धाम भी हैं, जहां तक पहुंचना और जलाभिषेक करना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। दुर्गम भौगोलिक स्थितियों के कारण इन स्थानों पर पूजा की परंपराएं सामान्य मंदिरों से काफी भिन्न हैं।

कैलाश पर्वत: महादेव का आदि निवास

तिब्बत स्थित कैलाश पर्वत को भगवान शिव का प्रमुख धाम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके मुख्य शिखर पर चढ़ना वर्जित है, इसलिए यहां श्रद्धालु सामान्य मंदिरों की तरह शिवलिंग पर सीधे जल नहीं चढ़ाते। भक्त कैलाश की ओर मुख करके ध्यान लगाते हैं और मानसिक रूप से महादेव का जलाभिषेक कर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

आदि कैलाश और मणिमहेश

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित आदि कैलाश को छोटा कैलाश भी कहा जाता है। यहां भक्त पवित्र पार्वती सरोवर के जल से महादेव को अर्घ्य देते हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित मणिमहेश कैलाश में श्रद्धालु झील में स्नान के बाद उस पवित्र जल को महादेव की ओर अर्पित करते हैं। मणिमहेश में झील के पास स्थित शिव प्रतिमाओं पर जलाभिषेक की परंपरा भी प्रचलित है।

किन्नर कैलाश और श्रीखंड महादेव

हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों पर स्थित ये दोनों स्थान अपनी कठिन यात्रा के लिए जाने जाते हैं:

  • किन्नर कैलाश: किन्नौर जिले में स्थित इस स्थान पर एक विशाल प्राकृतिक शिवलिंग मौजूद है। यहां पहुंचने वाले भक्त विधि-विधान से जलाभिषेक कर आरती और पूजा-अर्चना करते हैं।
  • श्रीखंड महादेव: कुल्लू जिले में स्थित यह तीर्थ स्थल अपनी चुनौतीपूर्ण चढ़ाई और बर्फीले रास्तों के लिए जाना जाता है। यहां एक विशाल चट्टानी संरचना को शिव का स्वरूप मानकर भक्त प्राकृतिक जलस्रोतों से जल लाकर अर्पित करते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित लोक कथाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना है।