Mysterious भारत के अनोखे मंदिर: जहाँ मूर्ति नहीं, फिर भी अटूट है आस्था

भारत के रहस्यमयी मंदिर: जहां बिना मूर्ति के होती है पूजाImage Credit source: PTI

भारत के रहस्यमयी मंदिर: जहां बिना मूर्ति के होती है पूजाImage Credit source: PTI

भारत के अनोखे मंदिर: जहां नहीं है कोई प्रतिमा

भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैले हमारे देश में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनके रहस्य आज भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने हुए हैं। आम तौर पर मंदिरों में हम देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाओं की पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे भी प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती? इन मंदिरों में प्राकृतिक स्वरूपों या यंत्रों को ही ईश्वर का रूप मानकर पूजा जाता है। आइए, जानते हैं इन अद्भुत मंदिरों के बारे में।

इन प्रसिद्ध मंदिरों में नहीं है मूर्ति

कामाख्या देवी मंदिर: असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती की योनि गिरी थी। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक योनि के आकार की चट्टान की पूजा की जाती है, जो हमेशा जलधारा से भीगी रहती है। यह प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है।

अमरनाथ गुफा: जम्मू-कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा में प्रकृति का अद्भुत चमत्कार देखने को मिलता है। यहां साल के कुछ निश्चित समय में बर्फ से हिम शिवलिंग का निर्माण होता है, जिसके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु कठिन यात्रा तय करते हैं। यहां कोई मानव-निर्मित प्रतिमा नहीं है।

अचलेश्वर महादेव मंदिर: राजस्थान के माउंट आबू की पहाड़ियों में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर में शिव जी की कोई मूर्ति या पारंपरिक शिवलिंग नहीं है। यहां एक प्राकृतिक कुंड है, जिसे भगवान शिव के अंगूठे का निशान माना जाता है। भक्त इसी की पूजा करते हैं।

ज्वाला जी मंदिर: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित ज्वाला जी मंदिर में अनंत काल से नौ प्राकृतिक ज्वालाएं जल रही हैं। इन्हें ही देवी के नौ स्वरूप मानकर पूजा जाता है। हैरानी की बात यह है कि ये ज्योत किसी तेल या घी से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से प्रज्वलित हैं।

अन्य प्रमुख मंदिर जहां होती है यंत्रों की पूजा

भारत के कुछ अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों की सूची नीचे दी गई है जहां प्रतिमाओं के स्थान पर विशेष स्वरूपों को पूजा जाता है:

मंदिर का नामस्थानपूजनीय स्वरूप
अंबाजी मंदिरगुजरातश्री बीस यंत्र
कालीमठ मंदिरउत्तराखंडश्री यंत्र
कोडुंगल्लूर भगवती मंदिरकेरलगुप्त कुंड

कालीमठ मंदिर: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित इस मंदिर में देवी काली की प्रतिमा के बजाय श्री यंत्र की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहीं माता काली धरती में समा गई थीं।

कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर: केरल के त्रिशूर जिले में स्थित इस मंदिर के गर्भगृह में एक गुप्त कुंड है, जिसे ही देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

वरुण कुमार: वरुण कुमार पिछले पांच वर्षों से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। उन्होंने 2021 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की। प्रभासाक्षी और एबीपी न्यूज के बाद अब वे TV9 डिजिटल की धर्म टीम के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।