आषाढ़ मासिक दुर्गाष्टमी 2026Image Credit: Pexels
मासिक दुर्गाष्टमी: इस दिन मां दुर्गा की आराधना से दूर होंगे सभी कष्ट
सनातन धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी के व्रत का विशेष स्थान है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माता दुर्गा को समर्पित यह व्रत रखा जाता है। इस बार आषाढ़ माह की यह पावन तिथि 21 जुलाई 2026 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन के समस्त भय, संकट और दरिद्रता का नाश होता है। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त, इसका महत्व और पूजन की सही विधि।
मासिक दुर्गाष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 21 जुलाई को सूर्योदय के साथ ही आरंभ हो जाएगी, जो दिन भर बनी रहेगी। इसलिए इस दिन सुबह के समय पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। शुभ समय की जानकारी नीचे दी गई है:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।
मासिक दुर्गाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों को साहस, शक्ति और विजय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। जो श्रद्धालु नियमित रूप से मासिक दुर्गाष्टमी का उपवास रखते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह व्रत परिवार में सुख-समृद्धि लाने के साथ-साथ आर्थिक तंगी को दूर करने में भी सहायक माना जाता है। यदि आप किसी गंभीर बीमारी, मानसिक तनाव, शत्रु भय या जीवन की बड़ी बाधाओं से जूझ रहे हैं, तो इस दिन की गई पूजा विशेष राहत देने वाली मानी गई है।
पूजन विधि: मां दुर्गा को कैसे करें प्रसन्न
दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के दौरान निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- माता को लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, रोली और ताजे लाल फूल अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप करें।
- दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या ‘ओम दुं दुर्गायै नमः‘ मंत्र का निरंतर जाप करें।
- अंत में माता की आरती करें और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
व्रत के दौरान बरतें ये सावधानियां
व्रत के दिन मन और कर्म की शुद्धि अत्यंत आवश्यक है। इस दिन सात्विक आहार का सेवन करें और यदि संभव हो तो फलाहार का पालन करें। क्रोध, द्वेष और किसी के अपमान से बचें। जरूरतमंदों की सेवा करना इस दिन बहुत पुण्यकारी माना जाता है।
| महत्वपूर्ण निर्देश | नियम |
|---|---|
| आहार | सात्विक भोजन या फलाहार |
| व्यवहार | क्रोध त्यागें और विनम्र रहें |
| कर्म | दान और सेवा कार्य करें |
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।










