Ashadha Amavasya 2026: पितृ दोष से मुक्ति के लिए पीपल के नीचे जलाएं दीपक

आषाढ़ अमावस्या 2026: पितृ दोष से मुक्ति के लिए खास उपायImage Credit source: PTI

आषाढ़ अमावस्या 2026: पितृ दोष से मुक्ति के लिए खास उपायImage Credit source: PTI

आषाढ़ अमावस्या 2026: धार्मिक महत्व और पितृ कृपा का महापर्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि का आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्व है। विशेष रूप से आषाढ़ मास की अमावस्या को पितरों को प्रसन्न करने, तर्पण और दान-पुण्य के कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या का पर्व 14 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना अत्यंत शुभ होता है। यह उपाय न केवल पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

कब है आषाढ़ अमावस्या 2026?

साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद दान, पिंडदान और अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, दिन भर की पूजा के बाद शाम के समय पीपल के नीचे दीपक जलाना पितृ शांति के लिए एक अनिवार्य अनुष्ठान माना जाता है।

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
आषाढ़ अमावस्या तिथि 14 जुलाई 2026 (मंगलवार)
मुख्य कार्य स्नान, दान, तर्पण और पीपल पूजन

पीपल के नीचे दीपक जलाने का रहस्य

शास्त्रों में पीपल के वृक्ष को साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। अमावस्या के दिन पितृ देवों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पीपल की पूजा करना अत्यंत प्रभावी माना गया है। आषाढ़ अमावस्या की संध्या को जब सरसों के तेल का दीपक पीपल के नीचे जलाया जाता है, तो इससे पितरों की तृप्ति होती है। यह उपाय परिवार में चल रही बाधाओं को दूर करने और पितृ दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक माना गया है।

पूजा और उपाय की सरल विधि

आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • स्नान और शुद्धि: शाम के समय स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • जल अर्पण: पीपल के वृक्ष के पास जाकर सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें।
  • दीपक प्रज्वलन: सरसों के तेल का दीपक जलाकर उसे पीपल के नीचे रखें।
  • स्मरण: दीपक जलाते समय अपने पितरों का ध्यान करें और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करें।
  • परिक्रमा: पीपल की 7 या 11 बार परिक्रमा करें और भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • दान: अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान अवश्य करें।

सरसों के तेल का महत्व

धार्मिक मान्यताओं में सरसों के तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने वाला माना गया है। अमावस्या की अंधेरी रात में पीपल के नीचे इसे जलाने से वातावरण में सकारात्मकता का संचार होता है। यह उपाय पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनकी कृपा प्राप्ति का एक सरल और अचूक माध्यम है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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