Alwar: जगन्नाथ मेले में 20 साल पुराने झूला संचालकों को हटाया, नई कंपनी को ठेका

राजस्थान के अलवर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जगन्नाथ मेले में इस बार विवाद गहरा गया है। पिछले 20 से 25 वर्षों से मेले में अपनी सेवाएं दे रहे स्थानीय झूला संचालकों को नगर निगम ने मेला परिसर से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। निगम प्रशासन ने इन संचालकों को मेला स्थल से करीब…

अलवर जगन्नाथ मेले से पुराने झूला संचालकों को हटाया, प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा

राजस्थान के अलवर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जगन्नाथ मेले में इस बार विवाद गहरा गया है। पिछले 20 से 25 वर्षों से मेले में अपनी सेवाएं दे रहे स्थानीय झूला संचालकों को नगर निगम ने मेला परिसर से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। निगम प्रशासन ने इन संचालकों को मेला स्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर शिफ्ट कर दिया है, जिससे स्थानीय कारोबारियों में भारी रोष व्याप्त है।

बाहरी कंपनी को ठेका देने का आरोप

झूला संचालकों का आरोप है कि नगर निगम ने इस बार मेले के प्रबंधन का ठेका हरियाणा की एक निजी कंपनी को सौंप दिया है। इसी के चलते वर्षों से मेले की रौनक बढ़ाने वाले स्थानीय संचालकों को दरकिनार कर दिया गया है। संचालकों का कहना है कि इस फैसले से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

  • स्थानीय रोजगार पर संकट: दशकों से जुड़े परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।
  • प्रशासनिक चेतावनी: मेला स्थल के 3 किलोमीटर के दायरे में झूले लगाने पर चालान काटने की धमकी दी गई है।
  • अनसुनी फरियाद: संचालकों का दावा है कि नगर निगम के अधिकारियों ने उनकी समस्याओं को सुनने से साफ इनकार कर दिया है।

क्या है झूला संचालकों का पक्ष?

सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र क्रांतिकारी ने इस मामले को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, झूला संचालक योगेश कुमार ने बताया कि वे और उनके पिता पीढ़ियों से इस मेले का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम निर्धारित शुल्क देने के लिए तैयार थे, लेकिन निगम ने ‘जगह नहीं होने’ का बहाना बनाकर हमें बाहर कर दिया। पहले मेले के बाहर छोटे झूले लगाने के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन इस बार दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है।”

मुद्दा विवरण
प्रभावित क्षेत्र अलवर जगन्नाथ मेला परिसर
मुख्य विवाद हरियाणा की कंपनी को ठेका और स्थानीय संचालकों की बेदखली
प्रशासनिक रुख 3 किलोमीटर के दायरे में झूले लगाने पर कार्रवाई की चेतावनी

नगर निगम का क्या कहना है?

इस पूरे मामले पर नगर निगम के आरओ और मेला प्रभारी भुवन शुक्ला ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेला परिसर का टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और दुकानों का आवंटन भी नियमानुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि मेले के बाहर झूला संचालकों के चालान काटने या उन्हें हटाने जैसी किसी भी औपचारिक जानकारी से वे फिलहाल अनभिज्ञ हैं। मामले की पूर्ण जानकारी लेने के बाद ही निगम प्रशासन इस पर कोई अंतिम टिप्पणी करेगा।

फिलहाल, अलवर के इस प्रसिद्ध मेले में झूला संचालकों का यह विरोध प्रदर्शन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इन छोटे संचालकों को मेले के बाहर व्यापार करने की अनुमति देता है या फिर विवाद और तूल पकड़ेगा।


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