जिले में पशुओं के काटने से बढ़ा संक्रमण का खतरा, रोजाना 33 लोग पहुंच रहे अस्पताल
जिले में पशुओं के काटने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में हर दिन औसतन 33 लोग एंटी-रेबीज उपचार के लिए अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल आवारा पशु ही नहीं, बल्कि बिना टीकाकरण वाले पालतू कुत्ते और बिल्लियां भी रेबीज सहित कई खतरनाक जूनोटिक संक्रमणों का मुख्य कारण बन सकते हैं।
बीते तीन महीनों के आंकड़े और जूनोटिक बीमारियों का प्रकोप
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन महीनों के भीतर ही कुत्ते, बंदर और अन्य पशुओं के काटने से घायल हुए 2955 लोग इलाज के लिए एंटी-रेबीज केंद्रों पर पहुंचे हैं। इसके अलावा, इस वर्ष जून माह तक विभिन्न संक्रामक बीमारियों की पुष्टि हुई है, जो सीधे तौर पर पशुओं या उनके संपर्क से जुड़ी हैं:
- ब्रुसेलोसिस: 14 मरीज
- स्क्रब टायफस: 10 मरीज
- लेप्टोस्पाइरोसिस: 03 मरीज
पशुओं से इंसानों में फैलने वाले रोगों की भयावहता
स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंसानों में सामने आने वाले कुल नए संक्रामक रोगों में से 75 प्रतिशत बीमारियां पशुओं के जरिए ही फैलती हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और परजीवियों से होने वाली ये जूनोटिक बीमारियां कई माध्यमों से मानव शरीर में प्रवेश कर सकती हैं। इनमें संक्रमित पशुओं का सीधा संपर्क, बिना उबला दूध पीना, अधपका मांस खाना, दूषित पानी का सेवन और चूहों व टिक्स जैसे परजीवी मुख्य भूमिका निभाते हैं।
प्रमुख जूनोटिक बीमारियों की सूची
| बीमारी का नाम | फैलाव का कारण |
|---|---|
| रेबीज | संक्रमित पशुओं का काटना |
| स्क्रब टायफस | माइट्स और टिक्स के काटने से |
| ब्रुसेलोसिस | दूषित दूध व डेयरी उत्पाद |
| इबोला | पशुओं के सीधे संपर्क से |
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करें और पशुओं के संपर्क में आने के बाद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। किसी भी प्रकार की चोट या लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क करें।










