Jhalawar नगर परिषद में अधिकारियों का टोटा, कामकाज ठप होने से जनता परेशान

झालावाड़ नगर परिषद इन दिनों घोर प्रशासनिक संकट से जूझ रही है। अधिकारियों के रिक्त पदों के चलते शहर का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। हाल ही में आयुक्त अशोक शर्मा को एपीओ (APO) किए जाने के बाद से यह पद खाली पड़ा है, और अब तक सरकार की ओर से किसी…

झालावाड़ नगर परिषद में प्रशासनिक संकट: अधिकारियों की कमी से ठप पड़े विकास कार्य

झालावाड़ नगर परिषद इन दिनों घोर प्रशासनिक संकट से जूझ रही है। अधिकारियों के रिक्त पदों के चलते शहर का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। हाल ही में आयुक्त अशोक शर्मा को एपीओ (APO) किए जाने के बाद से यह पद खाली पड़ा है, और अब तक सरकार की ओर से किसी भी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। आलम यह है कि नगर परिषद लंबे समय से कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे चल रही है, जिसका सीधा असर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

शहरी राजस्व शिविरों की फाइलें धूल फांक रही हैं

राज्य सरकार द्वारा आयोजित शहरी राजस्व शिविरों के दौरान शहर के निवासियों ने पट्टों और अन्य जरूरी कार्यों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए थे। हालांकि, अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण इन आवेदनों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आयुक्त के साथ-साथ परिषद के राजस्व अधिकारी और नगर नियोजक का भी तबादला हो चुका है।

समस्या प्रभाव
आयुक्त का पद रिक्त प्रशासनिक निर्णय और फाइलों का निपटारा ठप
उच्च न्यायालय की रोक राजकीय भूमि और कच्ची बस्तियों के नियमन में बाधा
प्रमुख अधिकारियों का तबादला राजस्व शिविरों के आवेदनों पर काम बंद

आमजन का आक्रोश: विकास कार्य और मूलभूत सुविधाएं नदारद

पट्टों के अलावा, शहर की बदहाल स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। पूर्व पार्षद रमजान खान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आम नागरिक पट्टे बनवाने के लिए स्टाम्प और फोटोकॉपी जैसे कार्यों में अपना पैसा और कीमती समय खर्च कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते उन्हें सिर्फ मायूसी हाथ लग रही है।

नगर परिषद में स्थायी आयुक्त की कमी का असर केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भी गहरा असर पड़ा है। पूर्व पार्षद के अनुसार:

  • शहर की सड़कों पर पसरा अंधेरा और स्ट्रीट लाइटों का अभाव।
  • जगह-जगह फैली गंदगी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
  • आवारा पशुओं का आतंक, जिसके चलते पूर्व में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय लेकर स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं की गई, तो शहर का विकास कार्य पूरी तरह से पटरी से उतर जाएगा। कार्यवाहक व्यवस्था शहर की जटिल समस्याओं को सुलझाने में नाकाम साबित हो रही है, जिससे जनता में गहरा रोष व्याप्त है।


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