राजस्थान में RGHS पर कड़ा प्रहार: 51 अस्पतालों पर गिरी गाज, जवाहिर अस्पताल भी ब्लैकलिस्ट
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में धांधली और फर्जी क्लेम करने वाले संस्थानों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। पिछले तीन महीनों के भीतर प्रदेश भर के 51 सरकारी और निजी अस्पतालों को योजना से बाहर करते हुए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई में जैसलमेर का प्रमुख सरकारी अस्पताल ‘जवाहिर हॉस्पिटल’ भी शामिल है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बुजुर्ग पेंशनर्स की बढ़ी मुश्किलें
जवाहिर अस्पताल के ब्लैकलिस्ट होने से सबसे ज्यादा मार बुजुर्ग पेंशनर्स पर पड़ी है। शुगर, बीपी, हृदय रोग और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज इलाज के लिए पूरी तरह से इसी अस्पताल पर निर्भर थे। अब स्थिति यह है कि उन्हें इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है या मजबूरी में जोधपुर और जयपुर जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और अनियमितताओं की सजा अंततः आम जनता को भुगतनी पड़ रही है।
ऑडिट में उजागर हुई बड़ी वित्तीय धांधली
स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई विशेष ऑडिट में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए अस्पतालों ने निम्नलिखित हथकंडे अपनाए थे:
- ओपीडी मरीजों को आईपीडी में भर्ती दिखाना: अधिक भुगतान पाने के लिए ओपीडी मरीजों को रिकॉर्ड में भर्ती दिखाया गया।
- अनावश्यक लैब जांच: मरीजों की सहमति के बिना ही महंगी और अनावश्यक जांचें की गईं।
- बार-बार बिलिंग: एक ही इलाज के लिए बार-बार बिल बनाकर सरकारी राशि का अनुचित क्लेम किया गया।
- मिलीभगत का खेल: डॉक्टरों और निजी लैब की मिलीभगत से कागजों पर फर्जी इलाज दिखाकर भुगतान हड़पा गया।
स्वास्थ्य मंत्री के सख्त निर्देशों के बाद विभाग ने इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए इन संस्थानों को योजना से बाहर कर दिया है।
CMHO का स्पष्टीकरण
जैसलमेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि जवाहिर अस्पताल को ब्लैकलिस्ट करने की सूचना उन्हें भी सूची के माध्यम से ही मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर से अस्पताल के खिलाफ ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गई थी। डॉ. पालीवाल ने कहा, “अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, संभव है कि मुख्यालय ने सीधे ऑनलाइन डेटा और ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण कर यह बड़ा निर्णय लिया हो।”
| विवरण | प्रमुख बिंदु |
|---|---|
| कुल ब्लैकलिस्ट अस्पताल | 51 (पिछले 3 माह में) |
| प्रमुख प्रभावित अस्पताल | जवाहिर हॉस्पिटल, जैसलमेर |
| कार्रवाई का कारण | फर्जी क्लेम, अनियमितताएं और ऑडिट में धांधली |










