बांसवाड़ा में निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंजा शहर
राजस्थान के बांसवाड़ा में गुरुवार को आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। नेमा समाज और जगदीश मंडल के संयुक्त तत्वावधान में भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र और माता सुभद्रा की ऐतिहासिक रथयात्रा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन करते हुए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उतरे। पूरा शहर ‘जय जगन्नाथ’ के नारों से भक्तिमय हो गया, जहां धर्म और सामाजिक समरसता का अनूठा दृश्य देखने को मिला।
अखंड रामायण पाठ के बाद हुआ रथ का शुभारंभ
रथयात्रा के आयोजन से पूर्व जगदीश मंदिर में 24 घंटे का अखंड रामायण पाठ संपन्न हुआ। गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इसकी पूर्णाहुति की गई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की प्रतिमाओं को भव्य और आकर्षक रूप से सजाए गए रथ में विराजमान किया गया। शंखनाद और भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने स्वयं रथ की डोर थामकर प्रभु की सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया।
यात्रा का मार्ग और भव्य स्वागत
यह रथयात्रा जगदीश मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| क्रम | मार्ग का विवरण |
|---|---|
| 1 | जगदीश मंदिर (प्रारंभ स्थल) |
| 2 | आजाद चौक एवं सदर बाजार |
| 3 | पिपली चौक एवं पैलेस रोड |
| 4 | महालक्ष्मी चौक |
| 5 | जगदीश मंदिर (समापन) |
यात्रा के दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भगवान की आरती उतारी गई और पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। पिपली चौक पर श्रद्धालुओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक गरबा आकर्षण का केंद्र रहा। भीषण गर्मी को देखते हुए नेमा पिपली चौक समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेयजल और शरबत की विशेष व्यवस्था की गई थी।
आयोजन में समाज के प्रमुख पदाधिकारियों की भागीदारी
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में समाज के कई गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम की मुख्य व्यवस्थाओं में निम्नलिखित पदाधिकारी सक्रिय रहे:
- नेमा समाज: अध्यक्ष निमेष मेहता, सचिव सुबोध मालोत, कोषाध्यक्ष शैलेंद्र मेहता तथा उपाध्यक्ष चंकी शाह व शैलेश शाह।
- जगदीश मंडल: अध्यक्ष महेंद्र सराफ, सचिव संदीप शाह, राजेश वसानिया और मनोज चंचावत।
रथयात्रा के समापन पर जगदीश मंदिर में भगवान की महाआरती की गई, जिसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस आयोजन ने बांसवाड़ा में एकता और धार्मिक आस्था की एक नई मिसाल पेश की है।










