Fraud: विदेश भेजने के नाम पर ठगी, जयपुर में 3 फर्जी कॉल सेंटर पकड़े गए

राजधानी जयपुर में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय बिक्री कर (CST) की एनडीपीएस यूनिट ने बुधवार को एक विशेष अभियान के तहत शहर के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर तीन फर्जी कॉल सेंटरों को पकड़ा है। इस कार्रवाई में…

जयपुर में विदेश भेजने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: तीन अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश

राजधानी जयपुर में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय बिक्री कर (CST) की एनडीपीएस यूनिट ने बुधवार को एक विशेष अभियान के तहत शहर के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर तीन फर्जी कॉल सेंटरों को पकड़ा है। इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 22 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया है, जो इन केंद्रों के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे थे।

सोशल मीडिया और अखबारों के जरिए फैलाते थे जाल

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से लोगों को ठगता था। ये लोग प्रमुख समाचार पत्रों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने के लुभावने विज्ञापन देते थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले बेरोजगार युवाओं को ये गिरोह विदेश भेजने और अच्छी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर अपने जाल में फंसा लेते थे। इसके बाद, प्रोसेसिंग फीस और अन्य खर्चों के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में मोटी रकम जमा करवाई जाती थी।

छापेमारी का विवरण और बरामदगी

पुलिस की टीम ने सुनियोजित तरीके से इन ठगों के ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई का ब्यौरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

स्थान कार्रवाई का विवरण
महिमा ट्रिनिटी मॉल (महेश नगर) संचालक सारांश गोयल और समीर बंसल सहित 12 लोग पकड़े गए।
ओके प्लस मॉल (महेश नगर) पांच युवतियां कार्यरत मिलीं, संचालक फरार।
गणपति प्लाजा (जालूपुरा) पांच युवतियां काम करती मिलीं, संचालक की तलाश जारी।

पुलिस की आगे की कार्रवाई

पुलिस ने इन ठिकानों से एक लैपटॉप और करीब 40 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनका उपयोग ठगी के लिए किया जा रहा था। पुलिस की गिरफ्त में आए 22 लोगों को संबंधित थानों के सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल, पुलिस अब निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन जांच कर रही है:

  • फरार कॉल सेंटर संचालकों की धरपकड़।
  • ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की वित्तीय हिस्ट्री।
  • साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मास्टरमाइंड्स का पता लगाना।

साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और अब पुलिस इनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है।


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