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जिले में मानसून की सुस्ती से खरीफ फसलों पर मंडराया सूखा
जिले में मानसून की सक्रियता अचानक थम जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बारिश का लंबा अंतराल खरीफ फसलों के लिए संकट का कारण बन रहा है, जिससे खेतों की नमी तेजी से खत्म होती जा रही है। यदि अगले चार से पांच दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं होती है, तो जिले की लगभग 50 प्रतिशत फसलें सूखने की कगार पर पहुंच सकती हैं।
बुवाई का लक्ष्य और कृषि विभाग की चिंता
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई का काम पूरा हो चुका है, लेकिन बारिश की कमी ने तैयार फसल को खतरे में डाल दिया है। विभाग ने इस सत्र के लिए 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बाजरा और अन्य फसलें अपनी शुरुआती वृद्धि (ग्रोथ) के चरण में हैं, जिन्हें लगातार नमी की आवश्यकता है। बारिश में देरी के चलते फसलों के झुलसने और उत्पादन में भारी कमी आने की आशंका बढ़ गई है।
मानसून अपडेट: 23 जुलाई से राहत की उम्मीद
मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, मानसून की ट्रफ लाइन के अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक जाने के कारण पश्चिमी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की खबर दी है:
- 22-23 जुलाई से प्रदेश के पश्चिमी और मध्य इलाकों में बारिश बढ़ने के आसार हैं।
- जुलाई के अंतिम सप्ताह में जोधपुर और बीकानेर संभाग में मानसून के पुनः सक्रिय होने की संभावना है।
- इसका सीधा सकारात्मक असर नागौर जिले में देखने को मिल सकता है।
बढ़ती उमस और तापमान का हाल
शुक्रवार को नागौर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तेज उमस और गर्मी ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 17 से 29 जुलाई के बीच तापमान सामान्य से 1 से 2 डिग्री अधिक रहने के आसार हैं।
| विवरण | अनुमानित स्थिति |
|---|---|
| अधिकतम तापमान | सामान्य से 1-2 डिग्री अधिक |
| न्यूनतम तापमान | सामान्य के आसपास |
| वर्षा की संभावना | पश्चिमी राजस्थान में सामान्य से कम |
कृषि विभाग की वैकल्पिक रणनीति
संभावित सूखे के खतरे को भांपते हुए कृषि विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है और जिलों को वैकल्पिक बुवाई योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें और बदलती जलवायु के अनुसार अपनी कृषि रणनीति में बदलाव करें। फिलहाल, जिले के किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं और सभी को 23 जुलाई के बाद होने वाली बारिश का बेसब्री से इंतजार है।










