उदयपुर में भारत आदिवासी पार्टी का शक्ति प्रदर्शन, विस्थापन और पर्यावरण के मुद्दे पर सरकार को चेतावनी
उदयपुर में सोमवार को भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने जल-जंगल-जमीन और विस्थापन के गंभीर मुद्दों को लेकर एक विशाल आक्रोश रैली निकाली। मोहता पार्क से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर आदिवासियों को बेदखल करने वाली विभिन्न परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। धरियावद विधायक थावरचंद मीणा और बीएपी नेता कांतिलाल रोत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों की संस्कृति और उनके अस्तित्व को मिटाने की साजिश रची जा रही है।
किन परियोजनाओं का हो रहा है विरोध?
प्रदर्शन के दौरान बीएपी नेताओं ने कई विवादास्पद परियोजनाओं का जिक्र करते हुए उन्हें आदिवासी विरोधी बताया:
- कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व: पार्टी का दावा है कि इस परियोजना के कारण लगभग 1.6 लाख परिवार विस्थापन की कगार पर हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व की आड़ में जमीनें बड़े होटल कारोबारियों और उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी है।
- बुझा और चकमारिया डैम: कोटड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित इन बांधों के निर्माण से 30 हजार से अधिक लोग विस्थापित होंगे और उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न हो जाएगी।
- केन-बेतवा लिंक परियोजना: मध्य प्रदेश में इस परियोजना के कारण बेघर हो रहे आदिवासियों के डेढ़ महीने से जारी संघर्ष को बीएपी ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
संविधान और पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप
बीएपी नेता कांतिलाल रोत ने सरकार पर संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून को दरकिनार करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी विकास के विरुद्ध नहीं है, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं है जो आदिवासियों के पुरखों की आस्था, संस्कृति और उनके निवास को ही नष्ट कर दे। रोत ने माही डैम के विस्थापितों का उदाहरण देते हुए कहा कि दशकों बाद भी लोग आज मूल निवास जैसे दस्तावेजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो सरकार की विफलता का प्रमाण है।
आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी
धरियावद विधायक थावरचंद मीणा ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते इन विस्थापनकारी परियोजनाओं को रद्द नहीं किया और आदिवासियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसे मूलभूत अधिकारों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन केवल संभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने इसे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक उग्र बनाने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।










