झालावाड़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बड़ा प्रदर्शन: मांगों को लेकर सरकार को दी चेतावनी
राजस्थान के झालावाड़ जिले में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश सड़क पर उतर आया है। ‘अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ’ के बैनर तले हजारों महिला कार्यकर्ताओं ने एक विशाल रैली निकालकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मिनी सचिवालय के बाहर तीन घंटे से अधिक समय तक धरना दिया और भजन-कीर्तन के माध्यम से अनोखे अंदाज में सरकार की वादाखिलाफी का विरोध किया।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं जिलाध्यक्ष मंजू कारपेंटर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार केवल कोरे आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर मांगों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वार्ता के दौरान दिए गए भरोसे के बावजूद अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में भारी रोष व्याप्त है।
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आंदोलन की अगली रणनीति और चेतावनी
संगठन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार को कड़े संकेत दिए हैं। ज्ञापन के जरिए स्पष्ट किया गया है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। संगठन ने आगामी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा भी साझा की है:
- 1 जुलाई: प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार।
- 7 जुलाई: अनिश्चितकालीन आम हड़ताल और तालाबंदी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
| विषय | प्रमुख मांग |
|---|---|
| सेनेटरी नेपकिन वितरण | ऑनलाइन वितरण कार्य को बंद कर संबंधित विभाग को सौंपना। |
| सेवानिवृत्ति लाभ | बजट घोषणा 2025-26 के तहत 1 अप्रैल 2025 से ग्रेच्युटी का आदेश जारी करना। |
| भवन किराया | ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए उचित भवन किराए का भुगतान और पिछले एक साल का बकाया निस्तारण। |
| प्रोत्साहन राशि | आईसीडीएस कार्यों और सामुदायिक गतिविधियों (CBE) की लंबित प्रोत्साहन राशि का शीघ्र भुगतान। |
भवन किराए का मुद्दा बना बड़ी समस्या
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान में उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महज 200 रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 750 रुपये मासिक किराया दिया जा रहा है, जो कि आज की महंगाई के दौर में नाकाफी है। केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसके अलावा, कई कार्यकर्ताओं ने अपनी जेब से अधिक किराया देकर भवन लिए हुए हैं, जिनका भुगतान पिछले एक साल से अटका पड़ा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लगा दिए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।









