उज्जैन की शिप्रा नदी में एक और युवक की जलसमाधि, इस साल मौतों का आंकड़ा 19 पहुंचा
धार्मिक नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी एक बार फिर मौत का सबब बन गई है। ताजा घटनाक्रम में देवास के रहने वाले 24 वर्षीय अंगत सिलोड़िया की भूखी माता घाट पर गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब युवक नदी में स्नान करने पहुंचा था। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूचना मिलते ही शिप्रा तैराक दल के जांबाज सदस्य तेजा कहार, दीपक कहार और राकेश गोड़ मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ के जवानों के साथ मिलकर करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवक के शव को नदी से बाहर निकाला जा सका। बाद में शव को पंचनामा बनाकर पुलिस को सौंप दिया गया है।
शिप्रा नदी में बढ़ते हादसों का डरावना सच
शिप्रा तैराक दल के संतोष सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अब तक शिप्रा नदी में डूबने से 19 लोगों की जान जा चुकी है। नदी के किनारों पर बढ़ते हादसों को लेकर निम्नलिखित आंकड़े चिंताजनक हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल मृतक (जनवरी से अब तक) | 19 |
| सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्र | शीतलनाथ आश्रम घाट और भूखी माता घाट |
| बचाव कार्य में शामिल | शिप्रा तैराक दल एवं एनडीआरएफ |
क्यों जानलेवा साबित हो रही है शिप्रा नदी?
विशेषज्ञों और तैराक दल के अनुसार, नदी में होने वाले अधिकांश हादसे मानवीय लापरवाही का परिणाम हैं। प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
- गहराई का अंदाजा न होना: पर्यटक बिना गहराई मापे अचानक गहरे पानी में उतर जाते हैं।
- लापरवाही और मस्ती: दोस्तों के साथ धक्का-मुक्की या हंसी-मजाक के दौरान संतुलन बिगड़ने से युवक गहरे पानी में समा जाते हैं।
- नशा और स्टंटबाजी: कई लोग नशे की हालत में स्नान करते हैं, जबकि कुछ युवा सेल्फी लेने या स्टंट दिखाने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
- बचाव के प्रयास में जोखिम: अक्सर एक व्यक्ति को डूबता देख उसे बचाने के चक्कर में दूसरा व्यक्ति भी गहरे पानी में फंस जाता है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि शिप्रा नदी के घाटों पर सुरक्षा मानकों का पालन करें और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। विशेषकर अनजान घाटों पर बिना सावधानी बरते पानी में उतरना जानलेवा हो सकता है।










