Viral: राजगढ़ में बीमार गाय की मौत पर बवाल, डॉक्टर को थप्पड़ मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर स्थित पशु चिकित्सा विभाग के कार्यालय में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय गौशाला में एक गाय की मौत के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता और गौसेवक आक्रोशित होकर वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर…

राजगढ़: गौशाला में गाय की मौत पर भड़के बजरंग दल के कार्यकर्ता, पशु चिकित्सा विभाग में जमकर हंगामा

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर स्थित पशु चिकित्सा विभाग के कार्यालय में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय गौशाला में एक गाय की मौत के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता और गौसेवक आक्रोशित होकर वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका दावा है कि बीमार गाय को बचाने के लिए 10 दिनों तक मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन जिम्मेदार चिकित्सकों ने एक न सुनी, जिसके चलते अंततः गाय ने दम तोड़ दिया।

डॉक्टर और गौसेवकों के बीच तीखी बहस

कार्यालय में हंगामे के दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधुसूदन शाक्य और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जब अधिकारी ने कार्यकर्ताओं को शांत रहने और नारेबाजी न करने की नसीहत दी, तो मामला और गरमा गया। नाराज कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप कार्यालय के भीतर ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और गाय की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

वायरल ऑडियो: डिप्टी डायरेक्टर के बिगड़े बोल

इस पूरे मामले में एक ऑडियो क्लिप भी तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें मांडाखेड़ा गौशाला के गौसेवक और बजरंग दल के ग्राम सचिव हेमराज पवार की राजगढ़ के डिप्टी डायरेक्टर दयाराम अहिरवार के साथ बातचीत सुनाई दे रही है। बातचीत के मुख्य अंश नीचे दिए गए हैं:

पक्षबातचीत का सार
गौसेवक10 दिनों से गाय बीमार है, कई बार फोन किया पर कोई डॉक्टर नहीं आया।
डिप्टी डायरेक्टर10 दिन बाद क्यों फोन कर रहे हो? तुम्हें नंबर नहीं मालूम था?
गौसेवकडॉक्टर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही।
डिप्टी डायरेक्टरडॉक्टरों को पकड़कर गौशाला ले जाओ और उन्हें थप्पड़ मारो, उनकी ड्यूटी 24 घंटे की है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते विभाग द्वारा उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो आज गाय जीवित होती। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर पशु चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

  • मुख्य आरोप: 10 दिनों तक इलाज में देरी।
  • प्रमुख मांग: लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई।
  • स्थिति: बजरंग दल का कार्यालय में धरना जारी।