खंडवा के डॉक्टर का हाईकोर्ट में बड़ा दावा: प्रमोशन और वरिष्ठता में भेदभाव पर सरकार को नोटिस
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पदस्थ डॉक्टर सोमपाल सिंह ने वरिष्ठता (Seniority) और पदोन्नति (Promotion) में भेदभाव का आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप है कि लोक सेवा आयोग (PSC) की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद उन्हें विभाग द्वारा नियमितीकरण और प्रमोशन में नजरअंदाज किया गया। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने राज्य सरकार, लोक सेवा आयोग और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता डॉ. सोमपाल सिंह ने अदालत को बताया कि उन्होंने वर्ष 1991 में PSC परीक्षा पास की थी, लेकिन विभाग ने उनकी नियमित सेवा की गणना 1994 से की, जिससे उनकी वरिष्ठता सूची में स्थिति प्रभावित हुई। डॉ. सिंह ने डॉ. अविनाश दुबे का उदाहरण देते हुए दावा किया कि बिना PSC परीक्षा पास किए भी उन्हें 1989 से नियमित सेवा का लाभ दिया गया। याचिका के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- अनियमितता का आरोप: डॉ. सिंह का तर्क है कि समान परिस्थितियों के बावजूद उन्हें 1989 के बजाय 1994 से नियमित माना गया, जो कि भेदभावपूर्ण है।
- पदोन्नति में नुकसान: वरिष्ठता में इस अंतर के कारण डॉ. अविनाश दुबे को 2006 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिल गई, जबकि वे इस लाभ से वंचित रह गए।
- संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन: याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (सरकारी रोजगार में अवसर की समानता) का उल्लंघन बताया है।
हाईकोर्ट से क्या मांग की गई है?
डॉ. सोमपाल सिंह ने अदालत से मांग की है कि उनकी नियमित सेवा की गणना भी वर्ष 1989 से की जाए, ताकि उन्हें सही वरिष्ठता मिल सके। साथ ही, उन्होंने डॉ. अविनाश दुबे को मिले लाभ के अनुरूप स्वयं को भी वर्ष 2006 से प्रोफेसर पद का लाभ दिए जाने की प्रार्थना की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आयुष प्रजापति ने अदालत के समक्ष तथ्यों को रखा और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अब मामले में राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
