Ground Report: स्कूल में बच्चे से भेदभाव, जाति के नाम पर निकाला बाहर

दोपहर का समय है, एक मिट्टी के कच्चे आंगन में पुरानी चटाई पर नौ साल का मासूम बच्चा बैठा है। सामने चौथी कक्षा की हिंदी की किताब खुली है, लेकिन उसे पढ़ने की ललक अब आँखों से गायब हो चुकी है। यह वही बच्चा है जो कुछ दिन पहले नई कक्षा में जाने के उत्साह…

आलीराजपुर के स्कूल में जातिगत भेदभाव का आरोप: क्या सच में बच्चे की पढ़ाई पर लगा पूर्णविराम?

दोपहर का समय है, एक मिट्टी के कच्चे आंगन में पुरानी चटाई पर नौ साल का मासूम बच्चा बैठा है। सामने चौथी कक्षा की हिंदी की किताब खुली है, लेकिन उसे पढ़ने की ललक अब आँखों से गायब हो चुकी है। यह वही बच्चा है जो कुछ दिन पहले नई कक्षा में जाने के उत्साह के साथ स्कूल गया था, लेकिन अब उसने स्कूल की दहलीज लांघना छोड़ दिया है। आलीराजपुर जिले के खंडाला गमीर प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है।

परिजनों का आरोप है कि बच्चे के साथ पिछले तीन वर्षों से जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा था। यहाँ तक कि मिड-डे मील के लिए उसे घर से अलग बर्तन लाने को मजबूर किया गया। क्या वास्तव में यह जातिगत प्रताड़ना का मामला है या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है? हमारी ग्राउंड रिपोर्ट में जानें पूरी सच्चाई।

नाना का दर्द: मजदूरी नहीं, सम्मानजनक भविष्य का सपना

जब हम गांव पहुंचे, तो बच्चे के नाना हासम सिंह सोलंकी ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि बच्चा पढ़-लिखकर उनकी तरह मजदूरी नहीं करेगा। लेकिन अब वह स्कूल का नाम सुनते ही सहम जाता है। परिवार का दावा है कि तीन साल से बच्चे को दूसरे छात्रों से अलग बैठाया जाता था। जब मामला कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंचा, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।

विवाद की जड़: 1 जुलाई की वह घटना

नया शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू हुआ। बच्चा चौथी कक्षा में पहुंचा, लेकिन दोपहर होते-होते वह उदास होकर घर लौट आया। इसके बाद नाना ने जब स्कूल जाकर पूछताछ की, तो विवाद बढ़ गया। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि केवल बहस हुई थी, तो बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) इतनी जल्दी कैसे जारी कर दिया गया?

विवरण जानकारी
कुल विद्यार्थी 37 (15 बालक, 22 बालिकाएं)
स्कूल का नाम प्राथमिक विद्यालय, खंडाला गमीर
मुख्य आरोप जातिगत भेदभाव और अलग बर्तन लाना
प्रशासनिक पक्ष जातिगत भेदभाव से इनकार, आपसी झगड़ा बताया

शिक्षकों और प्रशासन का पक्ष: आरोपों को नकारा

स्कूल के शिक्षक सज्जनसिंह भयड़िया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्चे के नाना नशे की हालत में स्कूल आए थे और उन्होंने बेवजह विवाद खड़ा किया। शिक्षकों का दावा है कि वे बच्चे की पढ़ाई को लेकर गंभीर थे और उसे वापस बुलाने के लिए घर भी गए थे। वहीं, आलीराजपुर की कलेक्टर नीतू माथुर ने भी जातिगत भेदभाव की बात को नकारते हुए कहा है कि यह एक आपसी झगड़ा था, जिसके बाद नाना ने खुद ही बच्चे की टीसी निकलवा ली थी।

अनसुलझे सवाल

  • क्या टीसी जारी करने की विभागीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया?
  • यदि बच्चा अकेला दूसरे समुदाय का था, तो क्या उसे मानसिक रूप से अलग-थलग किया जा रहा था?
  • स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?

फिलहाल, बच्चा घर की चारदीवारी में सिमट कर रह गया है। प्रशासन जांच का दावा कर रहा है, लेकिन इस बच्चे का खोया हुआ आत्मविश्वास और उसकी शिक्षा का नुकसान कौन भरपाई करेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।


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