मैहर के सरकारी छात्रावास में खाने को लेकर बवाल, छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप
मैहर जिले के अमरपाटन स्थित शासकीय अनुसूचित जाति बालक छात्रावास में इन दिनों अव्यवस्थाओं को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता और मात्रा में भारी कटौती को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार पर्याप्त भोजन नहीं दिया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें भूखे पेट रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है।
20 छात्रों के लिए महज 750 ग्राम दाल, सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां
छात्रों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, छात्रावास में कुल 19 से 20 विद्यार्थी निवास करते हैं। सरकारी नियमों के अनुसार, प्रति छात्र 50 ग्राम दाल का मानक तय है, जिसका अर्थ है कि 20 छात्रों के लिए कम से कम 1 किलोग्राम दाल की आवश्यकता होती है। हालांकि, छात्रों का दावा है कि उन्हें बहुत कम मात्रा में राशन दिया जा रहा है।
| विवरण | मात्रा |
|---|---|
| नियम के अनुसार दाल की आवश्यकता | 1 किलोग्राम |
| हाल ही में उपलब्ध कराई गई दाल | 750 ग्राम |
| पूर्व में दी गई दाल की मात्रा | 600 ग्राम |
वार्डन और प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल
विद्यार्थियों ने छात्रावास के वार्डन और प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। कई बार मौखिक शिकायतें करने के बावजूद प्रबंधन ने स्थिति में सुधार करने के बजाय चुप्पी साधे रखी। कुप्रबंधन का आलम यह है कि छात्रों को पेट भरने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
जब बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो छात्रों ने अपनी आपबीती का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आते ही स्थानीय प्रशासन में खलबली मच गई। छात्रों ने अब जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता और मात्रा की सघन जांच हो।
- दोषी अधिकारियों और वार्डन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- सभी छात्रों को सरकारी मानकों के अनुसार पोषक भोजन सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर छात्रावास प्रबंधन की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। अब देखना यह होगा कि तहसीलदार की जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और छात्रों की समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।
