मध्य प्रदेश सरकार का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय कदम: 20 हजार करोड़ का बांड जारी
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इतिहास का सबसे बड़ा कर्ज लेने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटाने के लिए 22 साल की अवधि वाला बांड जारी किया है। इस प्रक्रिया को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुंबई कार्यालय के माध्यम से मंगलवार को नीलामी प्रक्रिया के जरिए पूरा किया गया। इसके अतिरिक्त, सरकार ने तीन अन्य किस्तों में 4,400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज भी लिया है, जिसे बुधवार को सरकारी खजाने में शामिल किया जाएगा।
आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म से नीलामी और ब्याज दर
वित्त विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस विशाल कर्ज को जुटाने के लिए बोली प्रक्रिया को आरबीआई के ई-कुबेर (e-Kuber) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित किया गया। निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 10,000 रुपये तय की गई है और इसके बाद निवेश 10,000 के गुणकों में किया जा सकेगा। सरकार ने इन सिक्योरिटीज पर 7.83 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का वादा किया है। इस बांड का ब्याज भुगतान प्रत्येक वर्ष 29 अक्टूबर और 29 अप्रैल को किया जाएगा। नीलामी का आधिकारिक परिणाम बुधवार को घोषित किया जाएगा।
तीन अलग-अलग किस्तों में अतिरिक्त कर्ज का विवरण
20 हजार करोड़ के मुख्य बांड के अलावा, राज्य सरकार ने मंगलवार को तीन अलग-अलग किस्तों में भी कर्ज लिया है, जिसकी कुल राशि 4,400 करोड़ रुपये है। इन कर्जों की अवधि और राशि का विवरण इस प्रकार है:
- 1,000 करोड़ रुपये: 8 साल की अवधि के लिए।
- 1,400 करोड़ रुपये: 12 साल की अवधि के लिए।
- 2,000 करोड़ रुपये: 22 साल की अवधि के लिए।
इन सभी कर्जों की राशि बुधवार, 22 जुलाई को राज्य सरकार को प्राप्त हो जाएगी, जिससे प्रदेश के विकास कार्यों और वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
प्रदेश पर बढ़ता कर्ज का बोझ और वित्तीय स्थिति
लगातार लिए जा रहे इन कर्जों के कारण राज्य की कुल देनदारियों में तेजी से इजाफा हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक ली गई कर्ज की कुल राशि बढ़कर 41,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इन नए कर्जों के बाद मध्य प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज का भार बढ़कर लगभग 5 लाख 30 हजार 514 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
गौरतलब है कि 31 मार्च 2026 तक की स्थिति में, राज्य पर बाजार ऋण, केंद्र सरकार से लिए गए कर्ज, वित्तीय संस्थानों की देनदारियां और अन्य मदों को मिलाकर कुल ऋण का आंकड़ा 4,88,714.17 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। महज 14 दिन पहले भी सरकार ने बाजार से 3,600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। सरकार का कहना है कि बुनियादी ढांचे के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
