ई-20 पेट्रोल पर अरविंद केजरीवाल का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, वाहन चालकों की समस्याओं का किया जिक्र
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार को ई-20 (E20) पेट्रोल के मुद्दे पर घेरा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति के कारण आम वाहन मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से न केवल गाड़ियों का माइलेज घट गया है, बल्कि इसके कारण वाहनों के इंजन में तकनीकी खराबी भी आ रही है, जिससे मरम्मत का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
इस मुद्दे को लेकर केजरीवाल ने दिल्ली में कई कार मैकेनिकों और गाड़ी मालिकों से सीधी बातचीत की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि वर्कशॉप्स में उन गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो ई-20 पेट्रोल के उपयोग के बाद खराब हुई हैं। केजरीवाल ने सरकार से अपील की है कि वे जमीनी हकीकत को स्वीकार करें और टीवी पर किए जाने वाले दावों से इतर इस नीति की गंभीरता से समीक्षा करें ताकि जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।
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ई-20 पेट्रोल से जुड़ी मुख्य चिंताएं
- वाहनों का माइलेज कम होना: वाहन मालिकों का कहना है कि ई-20 पेट्रोल डलवाने के बाद से उनकी गाड़ियों की औसत माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- बढ़ता मरम्मत खर्च: मैकेनिकों के अनुसार, ईंधन की गुणवत्ता और संरचना के कारण गाड़ियों के इंजन और अन्य हिस्सों में तकनीकी समस्याएं बढ़ रही हैं।
- आम आदमी पर आर्थिक बोझ: महंगाई के इस दौर में पेट्रोल पर अतिरिक्त खर्च और गाड़ियों की बार-बार मरम्मत मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
- नीति की समीक्षा की मांग: अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे विशेषज्ञों और वाहन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इस नीति के प्रभावों पर चर्चा करें।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
केजरीवाल ने अपने संबोधन में तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और झूठे विज्ञापनों के जरिए जनता की वास्तविक समस्याओं को नहीं छिपाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ई-20 ईंधन को जिस तरह से थोपा जा रहा है, वह आम लोगों की बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस नीति में सुधार नहीं किया गया, तो मध्यम वर्ग की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक ने जोर देकर कहा कि सरकार को जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अपनी ऊर्जा नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।




