Delhi News: अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 6 बरी

दिल्ली के बहुचर्चित अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। ताहिर हुसैन के साथ-साथ कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को भी दोषी माना…

अंकित शर्मा हत्याकांड: दिल्ली दंगा मामले में AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन दोषी करार

दिल्ली के बहुचर्चित अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिया है। ताहिर हुसैन के साथ-साथ कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को भी दोषी माना है।

न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। ताहिर हुसैन के अलावा जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है, उनमें कासिम, अनस, नाजिम और जावेद शामिल हैं। वहीं, पुख्ता सबूतों के अभाव में अदालत ने 6 अन्य आरोपियों को इस मामले से बरी कर दिया है। दोषियों को क्या सजा दी जाएगी, इस पर फैसला आगामी सुनवाई के दौरान लिया जाएगा।

क्या है 2020 दिल्ली दंगों से जुड़ा यह मामला?

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुई आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या से संबंधित है। उस समय दंगों के दौरान अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद किया गया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। जांच एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में यह आरोप लगाया था कि अंकित शर्मा की हत्या एक हिंसक भीड़ द्वारा की गई थी और इस पूरी साजिश में ताहिर हुसैन की भूमिका मुख्य थी।

दोषियों की सूची और कानूनी प्रक्रिया

कोर्ट ने अपने फैसले में निम्नलिखित व्यक्तियों को हत्या और दंगा भड़काने के मामले में दोषी पाया है:

क्रम संख्या दोषी का नाम
1 ताहिर हुसैन (पूर्व पार्षद)
2 कासिम
3 अनस
4 नाजिम
5 जावेद

सजा पर अगली सुनवाई का इंतजार

अदालत ने अभी केवल दोषसिद्धि (Conviction) पर अपना फैसला सुनाया है। अब सभी की निगाहें सजा के ऐलान पर टिकी हैं। अगली सुनवाई की तारीख पर अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकील अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे, जिसके बाद अदालत दोषियों को सजा सुनाएगी। यह फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में एक बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।


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