Bemetara: प्रदेश की पहली ओपन जेल, 200 कैदियों को मिलेगी नई जिंदगी

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सुधारवादी कदमों को बढ़ावा देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश को अपनी पहली ओपन जेल मिलने जा रही है, जिसे बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में स्थापित किया जाएगा। 10.20 हेक्टेयर के विशाल दायरे में फैली इस ओपन जेल में एक साथ 200 कैदियों को रखने की क्षमता…

छत्तीसगढ़ में पहली बार खुलेगी ओपन जेल: बेमेतरा में 200 कैदियों को मिलेगी नई जिंदगी

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सुधारवादी कदमों को बढ़ावा देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश को अपनी पहली ओपन जेल मिलने जा रही है, जिसे बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में स्थापित किया जाएगा। 10.20 हेक्टेयर के विशाल दायरे में फैली इस ओपन जेल में एक साथ 200 कैदियों को रखने की क्षमता होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर एक आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है।

क्या है ओपन जेल की अवधारणा?

ओपन जेल पारंपरिक जेलों से पूरी तरह अलग होती है। यहाँ कैदियों को ऊंची चारदीवारी और कड़ी सुरक्षा के बीच कैद नहीं रखा जाता। इसके बजाय, अच्छे आचरण वाले कैदियों को सीमित निगरानी में रहने और काम करने की आजादी दी जाती है। इस जेल की कार्यप्रणाली को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • स्वतंत्रता और अनुशासन: कैदियों को दिन के समय खेती, डेयरी, या छोटे उद्योगों में काम करने की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें तय नियमों का पालन करते हुए समय पर वापस लौटना अनिवार्य होगा।
  • कौशल विकास: कैदियों को 16 से अधिक विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे भविष्य में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
  • आर्थिक स्वावलंबन: बेमेतरा-सिमगा रोड पर कैदियों द्वारा संचालित ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप खोली जाएगी। साथ ही, उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री के लिए एक विशेष एंपोरियम भी बनाया जाएगा।

किन्हें मिलेगा ओपन जेल में रहने का मौका?

ओपन जेल में चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होगी। जेल महानिदेशक (DG) हिमांशु गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो कैदियों के चयन का अंतिम निर्णय लेगी। चयन के लिए मुख्य मानदंड इस प्रकार हैं:

मानदंड विवरण
सजा की अवधि आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी जिन्होंने 13 साल या उससे अधिक समय पूरा कर लिया हो।
आचरण जेल में रिकॉर्ड पूरी तरह साफ और व्यवहार अनुशासित होना चाहिए।
चयन प्रक्रिया जेल अधीक्षकों द्वारा भेजी गई फाइलों की समीक्षा DG स्तर की समिति करेगी।

रिहाई के बाद भी मिलेगा सहारा

सरकार का यह प्रयास केवल जेल के भीतर तक सीमित नहीं है। जेल विभाग ने इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया है। इस समझौते के तहत, जेल से रिहा होने वाले कैदियों को अपना स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंक से लोन दिलाने में मदद की जाएगी। यह पहल न केवल कैदियों के पुनर्वास में मददगार साबित होगी, बल्कि उन्हें अपराध की दुनिया से दूर एक नई और सकारात्मक शुरुआत करने का अवसर भी प्रदान करेगी।


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