Crude Oil: अमेरिका-ईरान तनाव से कीमतें 90 डॉलर के पार, भारत में बढ़ेगी महंगाई

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी तेजी दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई…

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी तेजी दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं।

तेल के दाम बढ़ने से भारत के लिए महंगाई और एनर्जी शॉक का जोखिम बढ़ गया है। जानकारों का मानना है कि इसका सीधा असर भारतीय रुपये की स्थिरता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है।

वहीं, दूसरी ओर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। रिटेल फ्यूल मार्जिन पर दबाव के चलते कंपनियों को डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर 20.4 रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, रिफाइनिंग मार्जिन में आई बढ़त ने कंपनियों के कुल मुनाफे को अभी सहारा दिया हुआ है।

ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार, एक हफ्ते में 16% की तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.69 डॉलर यानी करीब 3.05% की बढ़त के साथ 90.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो 11 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। बीते एक सप्ताह में क्रूड ऑयल में 16% की उछाल देखी गई है, जो अप्रैल के बाद से किसी एक हफ्ते में आई सबसे बड़ी तेजी है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड 88.43 डॉलर और अमेरिकी WTI क्रूड 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि इंडियन क्रूड बास्केट 81 डॉलर के आसपास है।

विशेषज्ञों की राय: भारत पर एनर्जी शॉक और रुपये के कमजोर होने का खतरा

जीओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के अनुसार, बाजार के सामने निकट भविष्य में कई चुनौतियां हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी बरकरार रहती है, तो भारत को फिर से एनर्जी शॉक का सामना करना पड़ सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में भी कच्चे तेल की कीमतों को वैश्विक महंगाई के लिए एक बड़ा खतरा बताया गया है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना 52%

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर 2026 की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना अब 52.4% हो गई है।

  • फेड रेट हाइक: 16 जुलाई 2026 को यह संभावना 47% थी, जो अब बढ़कर 52.4% पर पहुंच गई है।
  • औद्योगिक उत्पादन: अमेरिका में मई 2026 के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में केवल 0.1% की मामूली वृद्धि देखी गई है।
  • करेंसी मार्केट: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रिटिश पाउंड में बड़ी गिरावट आई है, जबकि भारतीय रुपया अन्य एशियाई मुद्राओं के साथ दबाव में है।

अमेरिकी शेयर बाजारों में अस्थिरता, संघर्ष के कारण सप्लाई चेन पर संकट

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक समुद्री तेल मार्गों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। ईरान द्वारा सीजफायर खत्म करने की घोषणा के बाद दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में आपूर्ति बाधित होने का डर बढ़ गया है, जिससे प्रमुख अमेरिकी इंडेक्स में भी अस्थिरता देखी जा रही है।

तेल कंपनियों का मार्जिन प्रभावित, डीजल पर प्रति लीटर 20 रुपये का घाटा

इक्किरिटी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल के महंगे होने से BPCL, HPCL और IOCL जैसी सरकारी कंपनियों का रिटेल मार्जिन सिकुड़ गया है।

  • पेट्रोल मार्जिन: पेट्रोल का मार्केटिंग मार्जिन 42.1% गिरकर 4.5 रुपये प्रति लीटर रह गया है।
  • डीजल मार्जिन: डीजल की बिक्री पर कंपनियों को पिछले हफ्ते के 15.4 रुपये की तुलना में अब 20.4 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है।

रिफाइनिंग स्प्रेड से कंपनियों को संजीवनी

रिटेल क्षेत्र में नुकसान के बावजूद, रिफाइनिंग कारोबार में कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है:

  • गैसोलीन क्रैक स्प्रेड: 27.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जो एक साल के औसत से 69% अधिक है।
  • गैसऑयल (डीजल) क्रैक स्प्रेड: 65.2 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ा, जो एक साल के औसत से 99% ज्यादा है।
  • रूस का प्रभाव: रूस द्वारा डीजल निर्यात पर प्रतिबंध और पश्चिम एशियाई तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति कम बनी हुई है।

आगामी दो तिमाहियों तक राहत की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 1 से 2 तिमाहियों तक मजबूत डीजल क्रैक स्प्रेड कंपनियों की कमाई को सहारा देते रहेंगे। हालांकि, रिफाइनरी क्षमता बढ़ने और इन्वेंट्री रीबिल्ड होने के बाद इन असाधारण मार्जिन के सामान्य होने की उम्मीद है।

क्रैक स्प्रेड और इंटीग्रेटेड मार्जिन क्या हैं?

क्रैक स्प्रेड कच्चे तेल और उससे बनने वाले पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों के बाजार मूल्य के बीच का अंतर है। वहीं, जब रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन को 1:1 के अनुपात में जोड़ा जाता है, तो उसे इंटीग्रेटेड मार्जिन कहा जाता है, जो तेल कंपनियों की वास्तविक लाभप्रदता दर्शाता है।