दिल्ली: BJP-RSS नेताओं की हत्या और देश के खिलाफ साजिश, PFI के 21 सदस्य गिरफ्तार

प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ा खुलासा किया है। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष NIA अदालत ने संगठन के चेयरमैन ओएमए सलाम और वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर समेत 21 प्रमुख सदस्यों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इन सभी पर…

प्रतिबंधित संगठन PFI के खिलाफ NIA की बड़ी कार्रवाई, BJP-RSS नेताओं की हत्या की साजिश का खुलासा

प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ा खुलासा किया है। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष NIA अदालत ने संगठन के चेयरमैन ओएमए सलाम और वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर समेत 21 प्रमुख सदस्यों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इन सभी पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और प्रमुख BJP-RSS नेताओं को निशाना बनाने की खतरनाक साजिश रचने का गंभीर आरोप है। कोर्ट ने इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया 29 जुलाई से शुरू करने का आदेश दिया है।

आरोप है कि इन लोगों ने युवाओं को गुमराह करके टेरर कैंप चलाए और देश की शांति व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश की। हालांकि, अदालत में पेश होने के दौरान सभी 21 आरोपियों ने अपने ऊपर लगे इन गंभीर आरोपों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। NIA ने सितंबर 2022 में देशभर में चलाए गए एक बड़े ऑपरेशन के दौरान इन सभी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से ही ये सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और तेज कर दी गई है।

क्या है PFI का खतरनाक ‘मिशन 2047’?

जांच एजेंसियों की फाइल से पता चला है कि PFI के सदस्य केवल हिंसक वारदातों तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके थे। NIA की जांच में सामने आए कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • विजन 2047: आरोपियों का मुख्य उद्देश्य साल 2047 तक भारत में शरिया कानून आधारित इस्लामिक खिलाफत की स्थापना करना था।
  • टारगेट किलिंग: साजिश के तहत BJP और RSS के प्रमुख नेताओं को चिन्हित किया गया था, ताकि समाज में डर का माहौल पैदा किया जा सके।
  • फंडिंग का जाल: आतंकी गतिविधियों और युवाओं की भर्ती के लिए देश-विदेश से भारी मात्रा में अवैध धन जुटाया जा रहा था।
  • गंभीर धाराएं: आरोपियों पर UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून) और IPC की कड़ी धाराओं के तहत देशद्रोह व आपराधिक साजिश के आरोप तय किए गए हैं।

इस मामले में बचाव पक्ष के वकीलों ने FIR में खामियों का दावा किया है, जबकि NIA ने अपनी चार्जशीट में पुख्ता सबूत पेश करने की बात कही है। देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक अत्यंत संवेदनशील मामला है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर संवैधानिक ढांचे को चुनौती देने की कोशिश की गई थी। अब कोर्ट की सुनवाई में इन सभी दावों और सबूतों पर विस्तार से बहस होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।