HDFC बैंक के Q1 नतीजे: मुनाफे में 4.98% की वृद्धि, बाजार के अनुमान से रहा पीछे
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। हालांकि, यह प्रदर्शन बाजार के जानकारों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर सका। CNBC-TV18 के पोल में विश्लेषकों ने बैंक के मुनाफे के 19,332 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था, जिससे यह आंकड़ा थोड़ा कम रहा।
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) और मार्जिन का प्रदर्शन
बैंक की मुख्य आय यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में सालाना आधार पर 6.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो बढ़कर 33,535.95 करोड़ रुपये हो गई है। बाजार ने इसके 34,353 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई थी। वहीं, बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट्स पर 3.26% रहा, जबकि इंटरेस्ट अर्निंग एसेट्स के आधार पर यह मार्जिन 3.40% दर्ज किया गया है।
एसेट क्वालिटी और प्रोविजनिंग का विवरण
बैंक की एसेट क्वालिटी पर नजर डालें तो 30 जून 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.17% रहे। पिछले तिमाही यानी 31 मार्च 2026 को यह आंकड़ा 1.15% था। वहीं, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) का स्तर 0.41% पर स्थिर है। बैंक का कुल प्रोविजनिंग और कंटिंगेंसीज खर्च 3,060 करोड़ रुपये रहा, जबकि कुल क्रेडिट कॉस्ट रेशियो 0.40% दर्ज किया गया है।
बाजार में HDFC बैंक के शेयरों की स्थिति
| विवरण | आंकड़ा/प्रतिशत |
|---|---|
| शुक्रवार को समापन भाव | 819.60 रुपये (+1.4%) |
| वर्ष 2026 में गिरावट | 17.2% |
| निफ्टी 50 इंडेक्स में गिरावट | 6.9% |
निवेशकों के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। साल 2026 में अब तक HDFC बैंक के शेयरों में 17.2% की गिरावट देखी गई है, जो व्यापक बाजार (निफ्टी 50) की 6.9% की कमजोरी की तुलना में काफी अधिक है।
महत्वपूर्ण वित्तीय शब्दावली
- नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक द्वारा लोन पर कमाए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अंतर, जो बैंक की प्राथमिक आय है।
- नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): बैंक की लाभप्रदता मापने का पैमाना, जो ब्याज कमाने वाली संपत्तियों और चुकाए गए ब्याज के बीच का अंतर दर्शाता है।
- NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट): जब कोई कर्जदार 90 दिनों तक लोन की किस्त नहीं चुकाता, तो उसे NPA घोषित कर दिया जाता है। यह बैंक के लिए बैड लोन माना जाता है।









