देहरादून: भू-जल संरक्षण के लिए बनेगी नई पॉलिसी, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश
देहरादून में आयोजित SARRA की उच्च स्तरीय समिति की बैठक में जल संरक्षण को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश के गिरते भू-जल स्तर पर चिंता जताते हुए इसे रिचार्ज करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि SAARA (सारा) को अब आवासीय सोसायटियों और गैर-सरकारी संस्थानों के लिए एक नई ग्राउंड वाटर रिचार्ज पॉलिसी तैयार करनी होगी ताकि वर्षा जल का संचयन प्रभावी ढंग से हो सके।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने पर भी बल दिया। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व वाले धारे-नौलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के प्रस्ताव जल्द से जल्द शासन को भेजे जाएं। इसके अलावा, नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने को कहा गया है, ताकि ‘एक जनपद एक नदी’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को धरातल पर तेजी से उतारा जा सके।
परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की रणनीति
बैठक में SAARA की वर्तमान कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए:
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कुल 86 परियोजनाएं फिलहाल गतिमान हैं।
- उत्तरकाशी, नैनीताल और टिहरी जिलों में अब तक कुल 16 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं।
- बड़ी परियोजनाओं को गति देने के लिए उन्हें विभिन्न विभागों के बीच कन्वर्जेंस (समन्वय) के जरिए पूरा करने का सुझाव दिया गया है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव एल. फैन्नई, सचिव दिलीप जावलकर, रणवीर सिंह चौहान, सी. रविशंकर और विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सरकार का मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसके लिए सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।





