छत्तीसगढ़ में ठेकेदारों का हल्ला बोल: लंबित भुगतान के लिए किया अर्धनग्न प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ में निर्माण कार्यों के भुगतान में हो रही भारी देरी और विभागीय अनियमितताओं के खिलाफ राज्य के ठेकेदारों का गुस्सा फूट पड़ा है। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को प्रदेश भर के सैकड़ों ठेकेदार नवा रायपुर में एकजुट हुए। अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने निकले इन ठेकेदारों को पुलिस ने विधानसभा से करीब 200 मीटर पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान ठेकेदारों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारी ठेकेदार तूता स्थित धरना स्थल से विधानसभा की ओर कूच कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती देखी गई। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भुगतान न होने के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं और ठेकेदार भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी कई बार ज्ञापन सौंपे गए और जल जीवन मिशन कार्यालय का घेराव भी किया गया, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
भ्रष्टाचार और अफसरशाही पर बरसे ठेकेदार
बीरेश शुक्ला ने आगे कहा कि जल जीवन मिशन समेत अन्य निर्माण विभागों में भ्रष्टाचार और अफसरशाही का बोलबाला है। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद ठेकेदारों को भुगतान के लिए डेढ़ से दो साल तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। आगामी दो दिनों के भीतर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति तैयार की जाएगी।
ठेकेदारों की प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने अपनी मांगें प्रमुखता से रखी हैं, जिनमें से मुख्य निम्नलिखित हैं:
| क्रम | प्रमुख मांगें |
|---|---|
| 1 | 2200 करोड़ रुपए के लंबित बिलों का तत्काल भुगतान। |
| 2 | आगामी 3000 करोड़ रुपए के बिलों के लिए अग्रिम बजट का प्रावधान। |
| 3 | एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार रनिंग और पार्ट पेमेंट की प्रक्रिया शुरू करना। |
| 4 | कार्य पूर्ण होने पर 100% भुगतान की गारंटी। |
| 5 | एग्रीमेंट के बाद थोपे गए अतिरिक्त नियमों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करना। |
| 6 | भ्रष्ट अधिकारियों की निष्पक्ष जांच और उन पर कठोर कार्रवाई। |
ठेकेदारों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी इन मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने अधिकारों की लड़ाई को और अधिक उग्र करने के लिए मजबूर होंगे। सरकार और ठेकेदारों के बीच का यह टकराव अब प्रदेश के विकास कार्यों पर भी बड़ा संकट खड़ा कर रहा है।









