जशपुर के दोकड़ा में भक्ति की बयार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की ऐतिहासिक रथयात्रा की शुरुआत
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले स्थित कांसाबेल विकासखंड के दोकड़ा गांव में गुरुवार को ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गजपति महाराजा की पारंपरिक भूमिका निभाई। उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा-अर्चना की और हजारों श्रद्धालुओं के साथ मिलकर रथ को खींचकर यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया।
छेरा पहरा की रस्म और परंपरा का निर्वहन
पुरी की प्राचीन परंपराओं का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ भगवान के समक्ष शीश नवाया और प्रदेश की सुख-समृद्धि व बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। इसके बाद, मुख्यमंत्री ने ‘छेरा पहरा’ की रस्म निभाते हुए सोने की झाड़ू से रथ के सामने का मार्ग साफ किया और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव किया। इस दौरान गूंजते ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष और शंखध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
1942 से चली आ रही है दोकड़ा की अनोखी विरासत
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि दोकड़ा की रथयात्रा वर्ष 1942 से निरंतर चली आ रही है, जो हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और भगवान जगन्नाथ का संबंध सदियों पुराना है, जिसका प्रमाण यह है कि देवभोग का चावल आज भी पुरी के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा है।
सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का ब्यौरा
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की उपलब्धियों को साझा करते हुए निम्नलिखित जानकारी दी:
- प्रधानमंत्री आवास: राज्य में अब तक 11 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
- महतारी वंदन योजना: योजना की 29 किस्तें सफलतापूर्वक जारी की जा चुकी हैं।
- सुविधाएं: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 चौबीसों घंटे सक्रिय है और अटल डिजिटल सेवा केंद्रों से 520 से अधिक सेवाएं गांव स्तर पर मिल रही हैं।
- कनेक्टिविटी: जशपुर जिले में जल्द ही रेल नेटवर्क और मेडिकल कॉलेज की सौगात मिलेगी, जिससे विकास को नई गति मिलेगी।
नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में दर्शन देंगे प्रभु
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ मौसीबाड़ी पहुंच गए हैं, जहां वे नौ दिनों तक भक्तों को दर्शन देंगे। आयोजन की मुख्य तिथियां इस प्रकार हैं:
| कार्यक्रम | तिथि |
|---|---|
| हेरा पंचमी | 20 जुलाई |
| बाहुड़ा यात्रा | 24 जुलाई |
| सुना वेश | 25 जुलाई |
| नीलाद्री विजय (मंदिर वापसी) | 27 जुलाई |
सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कथा का आयोजन
मंदिर समिति ने बताया कि 17 से 21 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक कथा वाचक कामता प्रसाद शरण द्वारा श्री जगन्नाथ महाप्रभु की संगीतमय कथा सुनाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, 22 जुलाई को लिटिल चैंप प्रतियोगिता, 23 जुलाई को रंगोली व चित्रकला और 26 जुलाई को ओडिशा और झारखंड के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। दोकड़ा आज छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।










