धार भोजशाला विवाद: एक ही प्रवेश द्वार से नमाज और पूजा का संचालन कैसे होगा?
धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश ने एक बार फिर पुरानी बहस को हवा दे दी है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा है कि शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समाज के लिए नमाज अदा करने हेतु कोई खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहले ही अपने एक फैसले में भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूरे वर्ष पूजा-अर्चना का अधिकार दे चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही परिसर में दो अलग-अलग धार्मिक गतिविधियां कैसे संचालित होंगी? श्रद्धालुओं की आवाजाही, नमाजियों का प्रवेश मार्ग और मुख्य द्वार पर सुरक्षा का प्रबंधन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। फिलहाल प्रशासन ने कोई आधिकारिक योजना साझा नहीं की है, लेकिन कोर्ट के आदेशों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।
भोजशाला में प्रवेश की वर्तमान व्यवस्था
वर्तमान में भोजशाला परिसर में आवाजाही के लिए केवल एक ही मुख्य द्वार है, जहां पुलिस की स्थायी चौकी मौजूद रहती है। सुरक्षा जांच के बाद ही श्रद्धालु अंदर प्रवेश करते हैं। हालांकि, बसंत पंचमी जैसे विशेष अवसरों पर, जब भीड़ बहुत अधिक होती है, प्रशासन वैकल्पिक निकास द्वार का उपयोग करता है।
प्रशासन द्वारा अपनाई जाने वाली वैकल्पिक व्यवस्थाएं:
- भीड़ प्रबंधन: परिसर के बाईं ओर स्थित छोटे द्वार का उपयोग निकास के लिए किया जाता है ताकि मुख्य द्वार पर दबाव न पड़े।
- सुरक्षा घेरा: संवेदनशील अवसरों पर पुलिस, एएसआई और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की जाती हैं।
- बैरिकेडिंग: समय का निर्धारण और बैरिकेडिंग के जरिए दोनों समुदायों की गतिविधियों को अलग रखने का प्रयास किया जाता है।
ऐतिहासिक चुनौतियां और अतीत के उदाहरण
भोजशाला के इतिहास में कई बार बसंत पंचमी और शुक्रवार का दिन एक साथ पड़ा है। ऐसे में प्रशासन ने हमेशा सतर्कता बरती है।
| वर्ष | अपनाई गई कार्ययोजना |
|---|---|
| 2006 | पहली बार वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मुस्लिम नमाजियों को पीछे के ‘लकड़ी पीठ’ क्षेत्र से प्रवेश दिया गया। |
| 2013 | इसी तर्ज पर पीछे के मार्ग का उपयोग कर नमाजियों को परिसर तक सुरक्षित पहुंचाया गया। |
| 2026 | 23 जनवरी को पीछे के खुले हिस्से में टेंट लगाकर नमाज कराई गई, जिसका मुस्लिम समाज ने विरोध किया था। |
मुस्लिम पक्ष का विरोध और आपत्तियां
जनवरी 2026 में प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थान पर मुस्लिम समाज ने कड़ा एतराज जताया था। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि जिस स्थान पर उन्हें नमाज के लिए जगह दी गई थी, वह कब्रिस्तान का हिस्सा है। उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उस स्थान पर नमाज अदा करना उचित नहीं है। यही कारण है कि अब प्रशासन के सामने यह तय करना एक बड़ी चुनौती है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किस प्रकार किया जाए ताकि किसी भी पक्ष की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे और कानून-व्यवस्था बनी रहे।










