आयुष चिकित्सा की ओर बढ़ा लोगों का रुझान, पर 250 पदों पर डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी
आधुनिक दौर में बीमारियों से जूझ रहे मरीज अब केवल एलोपैथी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति पर भी भरोसा जता रहे हैं। इसका प्रमाण संभाग के आयुष अस्पतालों में उमड़ने वाली मरीजों की भारी भीड़ है। इस साल जनवरी से जून के बीच ही करीब 8.75 लाख से ज्यादा मरीजों ने आयुष चिकित्सा का सहारा लिया है। हालांकि, मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद आयुष विभाग के सामने डॉक्टरों और आवश्यक स्टाफ की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। संभागायुक्त की हालिया समीक्षा में यह खुलासा हुआ है कि विभाग में अभी भी 250 पद रिक्त पड़े हैं।
जिलेवार मरीजों की स्थिति और विभाग का विस्तार
संभाग में आयुष विभाग के अंतर्गत कुल 236 अस्पताल और औषधालय संचालित किए जा रहे हैं। सरकारी आयुष सेवाओं के प्रति बढ़ते भरोसे के कारण पिछले वर्ष 18 लाख से अधिक लोगों ने उपचार का लाभ लिया था। चालू वर्ष के पहले छह महीनों के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है:
- धार: करीब 1.71 लाख मरीज।
- खरगोन: लगभग 1.24 लाख मरीज।
- इंदौर: करीब 1.23 लाख मरीज।
रिक्त पदों का विवरण: स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडराता संकट
आयुष विभाग में मानव संसाधन की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। संभाग में कुल 1,153 स्वीकृत पदों में से 903 पद ही भरे हैं। रिक्त पदों की विस्तृत स्थिति नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:
| पद का नाम | स्वीकृत पद | रिक्त पद |
|---|---|---|
| दवासाज (हॉस्पिटल अटेंडेंट) | 229 | 109 |
| आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी | 202 | 34 |
| महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता | 179 | 45 |
दवासाज और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज और दवा वितरण की प्रक्रिया पर पड़ रहा है। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में मुख्य भूमिका निभाती हैं, जिनकी अनुपलब्धता से सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर और भविष्य की राह
संभाग में वर्तमान में 96 आयुष हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। योग, स्वस्थ जीवनशैली और आयुष चिकित्सा के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो इस वर्ष भी मरीजों का आंकड़ा पिछले साल के करीब पहुंच जाएगा। विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन खाली पदों को जल्द से जल्द भरने की है, ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें।










