Rewa: अब रीवा में ही बनेंगे आधुनिक कृत्रिम अंग, विंध्य को बड़ी सौगात

विंध्य क्षेत्र के दिव्यांगजनों के लिए मंगलवार का दिन एक नई उम्मीद लेकर आया। रीवा रेड क्रॉस सोसायटी में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अत्याधुनिक कृत्रिम अंग निर्माण इकाई का विधिवत शुभारंभ किया। इस नई पहल से अब दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंगों की जरूरत के लिए किसी दूसरे शहर या बाहरी संस्थाओं के चक्कर नहीं काटने…

रीवा को मिली बड़ी सौगात: रेड क्रॉस सोसायटी में अब अत्याधुनिक तकनीक से बनेंगे कृत्रिम अंग

विंध्य क्षेत्र के दिव्यांगजनों के लिए मंगलवार का दिन एक नई उम्मीद लेकर आया। रीवा रेड क्रॉस सोसायटी में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अत्याधुनिक कृत्रिम अंग निर्माण इकाई का विधिवत शुभारंभ किया। इस नई पहल से अब दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंगों की जरूरत के लिए किसी दूसरे शहर या बाहरी संस्थाओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब स्थानीय स्तर पर ही विश्वस्तरीय तकनीक से अंगों का निर्माण और वितरण संभव हो सकेगा।

जयपुर पर निर्भरता हुई खत्म, स्थानीय स्तर पर मिलेगी सुविधा

अब तक रीवा सहित पूरे विंध्य संभाग के दिव्यांगों को कृत्रिम अंगों की उपलब्धता के लिए मुख्य रूप से जयपुर की संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इस लंबी प्रक्रिया के कारण हितग्राहियों को न केवल आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था, बल्कि उन्हें महीनों तक लंबा इंतजार भी करना पड़ता था। नई इकाई के स्थापित होने से अब रेड क्रॉस सोसायटी स्वयं उन्नत तकनीक से कृत्रिम अंग तैयार कर सकेगी, जिससे समय की बचत होगी और पात्र दिव्यांगों को त्वरित राहत मिल पाएगी।

अत्याधुनिक कंप्यूटर और सेंसर तकनीक का होगा इस्तेमाल

उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि समय की मांग को देखते हुए इस इकाई में कंप्यूटर और सेंसर आधारित मशीनों को स्थापित किया गया है। इन उपकरणों की खासियत यह है कि इनके माध्यम से तैयार किए गए कृत्रिम अंग अधिक सटीक, हल्के और टिकाऊ होंगे। इससे दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में बेहतर सुविधा मिलेगी और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

  • स्थानीय निर्माण: अब जयपुर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं।
  • उन्नत तकनीक: कंप्यूटर और सेंसर आधारित सटीक अंगों का निर्माण।
  • समय की बचत: हितग्राहियों को अब लंबे इंतजार से मिलेगी मुक्ति।
  • आत्मनिर्भरता: रेड क्रॉस सोसायटी अब इस क्षेत्र में पूरी तरह सक्षम।

उपमुख्यमंत्री ने पुरानी यादें साझा कर बताया विंध्य का विकास

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने वर्ष 2003 से 2008 के बीच आयोजित दिव्यांग मेगा शिविर को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय जयपुर से विशेषज्ञों की टीम बुलाकर हजारों लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने कहा कि आज रीवा इस दिशा में आत्मनिर्भर हो गया है। यहाँ प्रशिक्षित डॉक्टर और तकनीशियनों की टीम आधुनिक मशीनों के साथ तैनात की गई है, जो न केवल अंग निर्माण करेंगे, बल्कि अन्य स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं भी स्थानीय स्तर पर प्रदान करेंगे। इस कदम से पूरे विंध्य क्षेत्र के दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

सुविधा का नामपहले की स्थितिअब की स्थिति
कृत्रिम अंग निर्माणजयपुर पर निर्भरतास्थानीय स्तर पर निर्माण
तकनीकपारंपरिककंप्यूटर एवं सेंसर आधारित
समयलंबा इंतजारत्वरित सेवा