Ganja तस्करी में आरोपी को 15 महीने की जेल, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

शाजापुर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने करीब ढाई साल पुराने गांजा तस्करी के एक मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी जाकिर खां को दोषी करार देते हुए उसे 15 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया…

शाजापुर: गांजा तस्करी के मामले में आरोपी को 15 महीने की जेल, अदालत ने सुनाया फैसला

शाजापुर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने करीब ढाई साल पुराने गांजा तस्करी के एक मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी जाकिर खां को दोषी करार देते हुए उसे 15 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला वर्ष 2023 का है, जब आरोपी को भारी मात्रा में नशीले पदार्थ के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था।

क्या था पूरा मामला?

शासकीय अभिभाषक महेंद्र सिंह परमार ने जानकारी देते हुए बताया कि 18 अक्टूबर 2023 को बैरछा पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मालीखेड़ी जंगल के समीप घेराबंदी की। तलाशी के दौरान पुलिस ने जाकिर खां के कब्जे से 1 किलो 200 ग्राम गांजा बरामद किया था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया था कि वह यह अवैध खेप बिरगोद के बड़ले क्षेत्र से लेकर आया था।

  • आरोपी का नाम: जाकिर खां
  • बरामदगी: 1 किलो 200 ग्राम गांजा
  • सजा: 15 महीने का कारावास
  • जुर्माना: 10,000 रुपए

फरार होने के बाद फिर हुई थी गिरफ्तारी

घटना के बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के दौरान आरोपी जाकिर खां पुलिस की गिरफ्त से बचकर फरार हो गया था। बाद में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे दोबारा गिरफ्तार किया और अदालत के समक्ष पेश किया, जिसके बाद न्यायिक प्रक्रिया पूरी की गई।

समाज के लिए खतरा है मादक पदार्थों की तस्करी

इस मामले की जांच तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक रामेश्वर पटेल द्वारा की गई थी। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन अवलोकन करने के बाद जाकिर खां को दोषी माना। अपने फैसले में विशेष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह हमारे युवाओं और पूरे समाज के लिए एक गंभीर खतरा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में नरमी बरतना उचित नहीं है।