Patwari हड़ताल: प्रमोशन में भेदभाव के खिलाफ तीन दिन की छुट्टी, प्रोटेक्शन एक्ट की मांग

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में राजस्व विभाग का कामकाज पूरी तरह से चरमरा गया है। जिले के लगभग 600 पटवारी बुधवार से तीन दिनों की सामूहिक छुट्टी पर चले गए हैं। प्रदेशव्यापी आह्वान पर किए जा रहे इस आंदोलन के चलते तहसील दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और…

बालाघाट में पटवारियों की तीन दिवसीय सामूहिक हड़ताल, कामकाज पूरी तरह ठप

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में राजस्व विभाग का कामकाज पूरी तरह से चरमरा गया है। जिले के लगभग 600 पटवारी बुधवार से तीन दिनों की सामूहिक छुट्टी पर चले गए हैं। प्रदेशव्यापी आह्वान पर किए जा रहे इस आंदोलन के चलते तहसील दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और राजस्व संबंधी कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय में पटवारियों के कक्ष तो खुले रहे, लेकिन कुर्सियां खाली होने के कारण लोग अपने काम करवाए बिना ही वापस लौटने को मजबूर हैं।

पांच सूत्रीय मांगों को लेकर लामबंद हुए पटवारी

पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने अपने आंदोलन की सूचना पहले ही ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन को दे दी थी। पटवारी शिफिल धमगाए के अनुसार, वे अपनी 5 प्रमुख मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार से गुहार लगा रहे हैं। नवंबर 2025 में उन्हें महाधिवेशन के दौरान समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय न लिए जाने से प्रदेशभर के पटवारियों में भारी आक्रोश है।

पटवारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • पटवारी कैडर का रिव्यू किया जाए और प्रमोशन के अवसर प्रदान किए जाएं।
  • समयमान वेतनमान का लाभ जल्द से जल्द लागू किया जाए।
  • नायब तहसीलदार पद के लिए विभागीय परीक्षा का आयोजन शीघ्र हो।
  • पटवारियों के लिए सुरक्षा हेतु प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए।
  • लंबित वित्तीय भुगतानों का निपटारा और संघ पदाधिकारियों के अनुचित तबादलों को रद्द किया जाए।

सरकार को 7 दिनों का अल्टीमेटम

पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल एक चेतावनी है। उन्होंने सरकार को अपनी मांगें पूरी करने के लिए 7 दिनों का समय दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

प्रशासनिक कार्यों पर गहरा रहा संकट

तहसीलदार छबि पंत ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पटवारी प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पटवारियों की हड़ताल से आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए सरकार को इस मामले पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

विवरणस्थिति
कुल पटवारी600
आंदोलन की अवधि3 दिन
प्रमुख प्रभावराजस्व और जमीन संबंधी कार्य ठप
अल्टीमेटम7 दिन