अनूपपुर में मानसून की बेरुखी: सूखे की आहट से किसानों की बढ़ी चिंता
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में इन दिनों मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की नींद उड़ा दी है। आसमान में छिटपुट बादलों की आवाजाही तो हो रही है, लेकिन झमाझम बारिश न होने से सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण खेतों की नमी पूरी तरह सूख चुकी है, जिससे कृषि कार्यों पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
खेतों में पड़ी दरारें, रोपाई का काम थमा
मानसून की बेरुखी के चलते जिले के अधिकांश इलाकों में धान की रोपाई का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया है। किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी (थरहा) तो तैयार है, लेकिन खेतों में पानी का अभाव होने के कारण वे रोपाई करने में असमर्थ हैं। तेज उमस और चिलचिलाती धूप ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
- नमी का अभाव: खेतों की मिट्टी सूखकर फटने लगी है, जिससे फसल की बुवाई संभव नहीं हो पा रही है।
- फसल बर्बादी का डर: जिन किसानों ने सिंचाई के वैकल्पिक साधनों से रोपाई की थी, उन्हें अब फसल के सूखने और लागत डूबने का डर सता रहा है।
- नदियों का हाल: सोन, तिपान, केवई और चंदास जैसी प्रमुख नदियां अभी भी सूखी पड़ी हैं, जबकि इस मौसम में इनमें जलस्तर काफी अधिक होना चाहिए था।
पिछले साल के मुकाबले आधी बारिश
भू-अभिलेख कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मानसून की रफ्तार पश्चिमी हवाओं के कारण अवरुद्ध हो गई है। जिले में बारिश का औसत पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम दर्ज किया गया है, जो चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।
| विवरण | औसत वर्षा (मिमी में) |
|---|---|
| पिछले वर्ष (1 जून से अब तक) | 410.9 मिमी |
| चालू वर्ष (1 जून से अब तक) | 237.2 मिमी |
अधीक्षक प्रदीप मोगरे ने स्पष्ट किया कि मानसून की सक्रियता में आई कमी के कारण जिले में जलस्तर नहीं बढ़ पाया है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ की फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। फिलहाल, अन्नदाता इंद्रदेव के सामने हाथ फैलाए बेहतर बारिश की उम्मीद कर रहे हैं।










