साइबर ठगी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सख्त: तीन राज्यों के DGP को 21 जुलाई को किया तलब
देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और जांच में हो रही भारी देरी को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जबलपुर की एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के साथ हुई 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। जस्टिस हिमांशु जोशी की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और दूरसंचार विभाग को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर के गोरा बाजार निवासी चैताली मित्रा, जो कि एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के नाम पर उनसे 6.24 लाख रुपये की ठगी की गई। उन्होंने स्थानीय पुलिस और एसपी स्तर तक शिकायत की, लेकिन कोई ठोस परिणाम न मिलने पर उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत की तल्ख टिप्पणी: हर सेकंड है कीमती
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच में हो रही लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि साइबर क्राइम की जांच में एक-एक सेकंड बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि पुलिस और संबंधित एजेंसियां रियल-टाइम समन्वय (Real-time coordination) नहीं करेंगी, तो अपराधी डिजिटल सबूत मिटाकर आसानी से बच निकलेंगे।
जांच में आ रही बाधाएं: पुलिस ने कोर्ट को बताया
कोर्ट के आदेश पर जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय सहित साइबर सेल के अधिकारी पेश हुए। पुलिस ने जांच में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को साझा किया:
- बैंकों से देरी: विभिन्न बैंकों की नोडल एजेंसियों से जानकारी जुटाने में ही 3 से 5 दिन का समय लग जाता है।
- तकनीकी चुनौतियां: अपराधी टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और फर्जी बैंक खातों का उपयोग कर रहे हैं।
- सबूतों का मिटना: आईपी लॉग और सब्सक्राइबर डिटेल मिलने तक आरोपी अपनी लोकेशन बदल लेते हैं और रकम निकाल लेते हैं।
- अंतर-राज्यीय समस्या: कई मामलों में अन्य राज्यों की पुलिस से सहयोग न मिल पाने के कारण जांच कछुआ गति से चलती है।
अदालत का अगला कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अंतर-राज्यीय समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
| निर्देश का विषय | विवरण |
|---|---|
| DGP की उपस्थिति | पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के DGP को 21 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। |
| नया पक्षकार | गृह मंत्रालय, RBI और दूरसंचार विभाग को मामले में शामिल किया गया है। |
| उद्देश्य | साइबर अपराध की जांच के लिए एक प्रभावी रियल-टाइम तंत्र विकसित करना। |
अब 21 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां इन राज्यों के पुलिस प्रमुखों को जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह आदेश साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी कानूनी कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








