पाली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश: 14वें दिन भी जारी रहा धरना, सरकार से लगाई गुहार
राजस्थान के पाली जिले में कलेक्ट्रेट के बाहर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का आंदोलन लगातार 14वें दिन भी जारी है। मंगलवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने एक विशाल रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अपनी मांगों को लेकर अडिग इन महिलाओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
महंगाई के दौर में मानदेय की मार
धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी बदहाल आर्थिक स्थिति और बढ़ते कार्यभार पर गहरी चिंता जताई। मारवाड़ जंक्शन की सहायिका गंगादेवी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने 20 साल पहले महज 500 रुपये के मासिक मानदेय पर काम शुरू किया था। आज दो दशक की लंबी सेवा के बाद भी उन्हें केवल 5 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आज की इस कमरतोड़ महंगाई में इतने कम वेतन में परिवार का गुजारा कैसे संभव है?
वहीं, रोहट की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भंवरीदेवी ने बताया कि वे साल 1991 से विभाग से जुड़ी हैं और अगले साल सेवानिवृत्त होने वाली हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी या अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
कार्यभार का दबाव और किस्तों में वेतन
रोहट की कार्यकर्ता सूर्यप्रभा दाधीच ने बताया कि उन्हें 10 हजार रुपये का मानदेय मिलता है, वह भी समय पर नहीं, बल्कि किस्तों में दिया जाता है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है, लेकिन उस अनुपात में न तो मानदेय बढ़ाया गया है और न ही सुविधाएं दी गई हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें
सरकार के सामने अपनी बात रखते हुए कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित मुख्य मांगे रखी हैं:
| क्रम संख्या | प्रमुख मांगें |
|---|---|
| 1 | मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करना। |
| 2 | आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना। |
| 3 | सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी सुविधाएं लागू करना। |
| 4 | कार्यभार कम करना और कार्यप्रणाली को सरल बनाना। |
आंदोलनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए मजबूर होंगी।










