अनूपपुर जनसुनवाई: आशियाना छिनने के डर से रो पड़ी महिला, सरकारी लापरवाही ने बढ़ाई मुश्किलें
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक महिला अपने घर को बचाने की गुहार लेकर कलेक्टर के पास पहुंची। ग्राम छिल्पा संजय नगर निवासी भगवनिया कोल ने आरोप लगाया कि पटवारी की मनमानी और प्रशासनिक फेरबदल के कारण उनका आशियाना अब खतरे में है। महिला के अनुसार, उनके ससुर को शासन से पट्टा प्राप्त हुआ था, जिस पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाया गया था। अब जमीन के रिकॉर्ड में हुई कथित छेड़छाड़ के बाद इसे प्राथमिक स्कूल के नाम दर्ज कर दिया गया है, जिससे पूरा परिवार बेघर होने के कगार पर है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित महिला भगवनिया कोल ने बताया कि उनके परिवार को साल 2010 में इंदिरा आवास और 2022 में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था। यह मकान खसरा नंबर 300/3/1 पर स्थित है। महिला का आरोप है कि साल 2025 में हलका पटवारी ने बिना किसी सूचना या जानकारी के जमीन का सीमांकन कर दिया। इस प्रक्रिया के बाद उक्त जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में प्राथमिक पाठशाला के नाम पर खसरा नंबर 300/3/2 के रूप में दर्ज कर दिया गया।
- सरकारी स्वीकृति: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण के समय प्रशासन ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
- अचानक बदलाव: खसरा नंबर बदलने से परिवार अब खुद को भूमिहीन मान रहा है और उन्हें बेदखली का डर सता रहा है।
- प्रशासनिक चूक: बिना जांच-पड़ताल के जमीन का रिकॉर्ड बदलने पर सवाल उठ रहे हैं।
दिव्यांग युवक को नहीं मिल रही ट्राईसाइकिल, डॉक्टरों के चक्कर काटने को मजबूर
जनसुनवाई में एक अन्य मामला भी चर्चा का विषय रहा। जन्म से दिव्यांग रमेश प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि वे सरकारी दफ्तरों और अस्पताल के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। रमेश का कहना है कि 50 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र होने के बावजूद, दो साल पहले पैर टूट जाने के कारण उनकी स्थिति और बिगड़ गई है।
| समस्या | विवरण |
|---|---|
| अधिकारी का जवाब | जनपद पंचायत ने 100% दिव्यांगता प्रमाण पत्र की शर्त रखकर आवेदन निरस्त कर दिया। |
| अस्पताल की लापरवाही | जिला अस्पताल के डॉक्टर हर गुरुवार को ‘अगले गुरुवार आने’ का बहाना बनाकर टाल रहे हैं। |
| परिणाम | प्रमाण पत्र न बनने के कारण रमेश को बैटरी वाली ट्राईसाइकिल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। |
जनसुनवाई में आए इन मामलों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। जहां एक ओर गरीब परिवार अपने सिर से छत छिनने के डर से सहमा हुआ है, वहीं दूसरी ओर दिव्यांग व्यक्ति सरकारी दफ्तरों की लालफीताशाही के कारण अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन मामलों में क्या ठोस कार्रवाई करता है।










