Cyber फ्रॉड: ग्वालियर के 21 करोड़ की ठगी का देशभर में फैला जाल

मध्य प्रदेश के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के साथ हुई 21 करोड़ 6 लाख रुपए की साइबर ठगी ने देश भर की जांच एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है। ठगों ने जिस शातिर तरीके से इस रकम को ठिकाने…

ग्वालियर: प्रतिष्ठित सीए से 21 करोड़ की साइबर ठगी, अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने ‘फोर-लेयर’ जाल में फंसाया

मध्य प्रदेश के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के साथ हुई 21 करोड़ 6 लाख रुपए की साइबर ठगी ने देश भर की जांच एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है। ठगों ने जिस शातिर तरीके से इस रकम को ठिकाने लगाया, उसने डिजिटल अपराध की एक नई और खतरनाक तस्वीर पेश की है।

राज्य साइबर सेल ग्वालियर की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ठगों ने इस पूरी राशि को चार अलग-अलग लेयर्स में बांटकर 20,000 से ज्यादा ट्रांजेक्शन के जरिए देश के कोने-कोने में फैला दिया।

किस तरह काम करता है ठगों का ‘फोर-लेयर’ चक्रव्यूह?

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगों ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए एक जटिल नेटवर्क का उपयोग किया। इस पूरी साजिश को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:

लेयरट्रांजेक्शन की संख्याविवरण
फर्स्ट लेयर99सीधे पीड़ित के खाते से जुड़े मुख्य खाते।
सेकंड लेयर450रकम को अलग-अलग खातों में डायवर्ट किया गया।
थर्ड लेयर12,000पैसों को और छोटे हिस्सों में बांटकर फैलाया गया।
फोर्थ लेयर7,500अंतिम चरण में पैसा एटीएम, क्रिप्टो और वाउचर में बदला गया।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राहत की खबर

साइबर सेल की टीम अब उन 99 ‘फर्स्ट लेयर’ बैंक खातों की बारीकी से जांच कर रही है, जहां से पैसा आगे ट्रांसफर किया गया था। पुलिस की मुस्तैदी के कारण अब तक लगभग 2 करोड़ रुपए को फ्रीज (होल्ड) कराने में सफलता मिली है। शेष राशि को ट्रैक करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय किया जा रहा है।

‘दिव्या सिंह’ बनकर किया शिकार

ठगी की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई, जब सीए अशोक विजयवर्गीय को ‘दिव्या सिंह’ नाम की एक महिला का मैसेज आया। खुद को निवेश सलाहकार बताने वाली इस महिला ने उन्हें यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर भारी मुनाफे का लालच दिया। इसके लिए एक फर्जी पोर्टल का उपयोग किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगों ने भारतीय मोबाइल नंबरों के अलावा एक विदेशी नंबर +1 (516) 713-7291 का इस्तेमाल किया, जो संभवतः अमेरिका या कनाडा से संचालित हो रहा था।

  • विदेशी नंबरों का उपयोग: ठगों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वर्चुअल नंबर प्लेटफॉर्म का सहारा लिया।
  • बड़े बैंकों का दुरुपयोग: फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई, केनरा और यस बैंक के कॉर्पोरेट खातों को लेयरिंग के लिए इस्तेमाल किया गया।
  • प्रभावित लोग: इस मामले में केवल सीए विजयवर्गीय ही नहीं, बल्कि उनके संपर्क में रहने वाले 35 से अधिक व्यापारी भी प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने सीए की सलाह पर निवेश किया था।

राज्य साइबर सेल के डीएसपी संजीय नयन शर्मा ने बताया कि टीम लगातार फर्जी यूआरएल और व्हाट्सएप नंबरों के आईपी एड्रेस को ट्रैक कर रही है। यह मामला देश की सबसे बड़ी साइबर धोखाधड़ी की वारदातों में से एक माना जा रहा है।