नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस लामबंद, राजभवन तक निकालेगी पदयात्रा
छत्तीसगढ़ में नकटी गांव में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस अब सड़क से लेकर राजभवन तक इस लड़ाई को ले जाने की तैयारी में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों के साथ नकटी गांव से राजभवन तक एक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी।
राज्यपाल से मुलाकात की तैयारी, भेजा गया रिमाइंडर
कांग्रेस इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग कर रही है। पार्टी ने राज्यपाल से मुलाकात के लिए समय मांगा है और इस संबंध में राजभवन को एक रिमाइंडर पत्र भी प्रेषित किया गया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि उन्हें 15 जुलाई तक मुलाकात का समय मिल जाएगा, जिसके बाद वे राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर पूरी घटना की जानकारी देंगे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करेंगे।
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राजीव भवन में बनी रणनीति
पदयात्रा की रूपरेखा तैयार करने के लिए आज रायपुर स्थित राजीव भवन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपीं। बैठक में शामिल प्रमुख नेताओं की सूची इस प्रकार है:
| पद/नाम |
|---|
| पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू |
| पूर्व विधायक विकास उपाध्याय एवं अनीता शर्मा |
| शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन |
| ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे |
| पूर्व महापौर प्रमोद दुबे एवं एजाज ढेबर |
| नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी |
सड़क से सदन तक गूंजेगा नकटी गांव का मुद्दा
कांग्रेस का स्पष्ट आरोप है कि नकटी गांव में गरीब परिवारों के घरों को अवैध रूप से तोड़ा गया है, जिससे कई लोग बेघर हो गए हैं। पार्टी का कहना है कि वे पीड़ितों को न्याय दिलाकर ही दम लेंगे। इस आंदोलन की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- 29 जून को नकटी गांव में प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की गई थी।
- कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाने का निर्णय ले चुकी है।
- पदयात्रा के माध्यम से सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
- पीड़ित परिवारों को पुनः बसाने और उन्हें मुआवजा देने की मांग मुख्य रूप से उठाई जाएगी।
बता दें कि इस कार्रवाई के बाद से ही कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। अब देखना यह होगा कि राजभवन तक की यह पदयात्रा सरकार पर कितना दबाव बना पाती है।









